पहाड़ों पर बाढ़ और भूस्खलन ने मचाया कहर, कई गांवों में मकान ढहे, हाईवे पर लंबा जाम

नईदिल्ली, २८ जुलाई ।
पहाड़ों में लगातार हो रही वर्षा और भूस्खलन के चलते लोगों की परेशानी बढ़ गई है। टिहरी में बादल फटने, भूस्खलन और नदी-नालों के उफनाने की घटनाओं से व्यापक पैमाने पर क्षति हुई है। बूढ़ाकेदार के तोली गांव में शुक्रवार रात बादल फटने से हुए भूस्खलन से मकान ध्वस्त हो गया। इसके मलबे में दबकर मां-बेटी की जान चली गई। घर के तीन सदस्यों ने किसी तरह भागकर जान बचाई। दूसरी ओर मनाली के पास अंजनी महादेव नाले में शनिवार सुबह बाढ़ आने से मनाली-लेह मार्ग लगभग सात घंटे बंद रहा। बाढ़ आने से सडक़ पर पत्थर व मिट्टी आ गई थी। उत्तराखंड के टिहरी क्षेत्र में तिनगढ़ गांव में प्रशासन ने भूस्खलन का खतरा देखते हुए गांव के लगभग 80 घरों को शनिवार सुबह ही खाली कराकर परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया था। शाम को भूस्खलन से यहां 15 मकान ध्वस्त हो गए। दोनों गांवों के लोग दहशत में हैं। प्रशासन की टीम राहत और बचाव कार्य में जुटी है। रुद्रप्रयाग में केदारनाथ राजमार्ग में भूस्खलन होने से यात्रियों को नौ घंटे तक पड़ावों में ही रोका गया। यहां करीब 2500 यात्री फंसे रहे। बद्रीनाथ हाईवे, कंचनगंगा के पास 12 घंटे से अधिक समय तक बंद रहा। उत्तरकाशी में गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग भी चार घंटे बाधित रहा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने टिहरी जिला प्रशासन को प्रभावित क्षेत्र के संवेदनशील गांवों को तत्काल चिह्नित करते हुए प्रभावितों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने के निर्देश दिए हैं। बादल फटने से बालगंगा और धर्मगंगा नदियों का रौद्र रूप देख बूढ़ाकेदार घाटी के हजारों ग्रामीण रात भर जागते रहे। उधर, झाला गांव में धर्मगंगा नदी का जलस्तर बढऩे के कारण नेपाली मूल के परिवार की झोपड़ी बह गई। इस दौरान मां-बेटी लापता हो गईं। जबकि दो लोगों ने किसी तरह भागकर जान बचाई। शुक्रवार की रात और शनिवार को उत्तरकाशी में भागीरथी ने रौद्र रूप ले लिया। इस कारण भगीरथ शिला से लेकर से लेकर घाट किनारे की दुकानें खाली करवानी करनी पड़ी। उफान के कारण गंगोत्री के निकट दिशानंद महाराज आश्रम में चार कुटिया बह गईं। एक साधु का रेस्क्यू किया गया।
भागीरथी के दूसरी ओर एक गुफा में फंसे तीन साधुओं को भी रेस्क्यू किया गया।हिमाचल में भी लगातार हो रही वर्षा से दिक्कतें बढ़ गई हैं। बुधवार रात यहां बादल फटने से भारी नुकसान हुआ था। विभिन्न स्थानों पर भूस्खलन के कारण प्रदेश में 10 सडक़ें यातायात के लिए बंद हैं। इन्हें खोलने के प्रयास किए जा रहे हैं। वर्षा के कारण पांच मकानों और पांच पशुशालाओं को नुकसान हुआ है। मौसम विभाग ने रविवार के लिए कांगड़ा और सिरमौर जिले में भारी वर्षा होने का यलो अलर्ट जारी किया है। 29 से 31 जुलाई तक प्रदेश के अधिकतर स्थानों पर भारी वर्षा का यलो अलर्ट जारी किया है।

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