पांच साल भी नहीं चली पौने दो करोड़ की सड़क

जांजगीर – चांपा । पुटपुरा से बनारी तक गुणवत्ताहीन सड़क का निर्माण किया गया है। दो वर्ष पूर्व इस सड़क का निर्माण एक करोड़ 73 लाख से अधिक की लागत से किया गया था। सड़क निर्माण के कुछ माह बाद से ही सड़क उखडऩे लगी थी। बीच में पेच वर्क कर उसे ठीक किया गया था। मगर कुछ माह में ही नई सड़क पूरी तरह से खराब हो गई। लगभग एक साल तक ग्रामीण खस्ताहाल सड़क से आवागमन करते रहे। अब जाकर विभाग ने सुध ली है और 75 लाख रुपये की लागत से मरम्मत कराई जा रही है। ठेकेदार के द्वारा मरम्मत के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत ग्राम पुटपुरा से बनारी तक गुणवत्ताहीन सड़क का निर्माण किया गया है। दो वर्ष पूर्व इस सड़क का निर्माण एक करोड़ 73 लाख से अधिक की लागत से तैयार किया गया था। सड़क निर्माण के कुछ माह बाद से ही सड़क उखडऩे लगी थी। इस मार्ग में दो पुल भी पड़ते हैं जिसमें से एक पुल टूट गया था बाद में पुल की बीच में मरम्मत कराई गई । वहीं सड़क भी पूरी से जर्जर हो गई थी। जिसे पेच वर्क कर ठीक किया गया था। मगर कुछ माह में ही नई सड़क पूरी तरह से खराब हो गई। वहीं इस मार्ग में बना दूसरा पुल भी अब टूट गया है। जिसकी मरम्मत में कोई ध्यान नहीं दिया गया। लगभग एक साल तक ग्रामीण खस्ताहाल सड़क से आवागमन करते रहे। बरसात के बाद सड़क और पूरी तरह जर्जर हो गई। अब जाकर विभाग ने सुध ली है और मरम्मत के साथ ही उखडऩे लगी सड़क को विभाग द्वारा सड़क मरम्मत का कार्य भी उसी ठेकेदार को दे दिया गया है जिसने दो साल पहले इस गुणवत्ताहीन सड़क का निर्माण किया था। ग्रामीणों का आरोप है । ठेकेदार द्वारा सड़क की चौड़ाई कम कर दी गई है। साथ ही साथ सड़क के किनारे ना तो मुरूम डाला गया है ना ही उसे रोलर से समतल किया गया है। यही वजह है कि मरम्मत के नाम पर डामर कई स्थानों पर अभी से उखडऩे लगी है। ऐसे में बरसात होने पर सड़क पूरी तरह उखड़ जाएगी। जर्जर पुल से रोज गुजर रहे भारी वाहन मुख्यमंत्री ग्राम सड़क होने के बाद भी इस मार्ग पर भारी वाहन घडल्ले से चल रहे है। इस मार्ग पर किसी भी तरह के संकेतक और चेतावनी बोर्ड नहीं लगाया गया है। सड़क में बना पुल बीच से टूटा हुआ है। जिसमें से भारी वाहन हमेशा गुजरते हैं। भारी वाहनों के चलने से कभी भी पुल धंस सकता है और कोई बड़ी दुर्घटना घटित हो सकती है। सबसे दुखद बात यह है कि 75 लाख रुपये की लागत से मरम्मत कराई जा रही है। ठेकेदार के द्वारा मरम्मत के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। जिसे लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप कि मार्ग में डामर की पतली परत बिछाई जा रही है। वही डामर के स्थान पर काले तेल का भरपूर प्रयोग किया जा रहा है इसे पहली नजर में देखने पर ही स्पष्ट हो रहा है कि इस सड़क निर्माण में ठेकेदार द्वारा अधिकारियों की मिलीभगत से घोर लापरवाही और अनियमित बढ़ती जा रही है इसका उच्च स्तरीय जांच किया जाना भी आवश्यक है। उधर ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि सड़क निर्माण की जांच यदि एक सप्ताह के भीतर नहीं किया गया तो वे मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क योजना कार्यालय का घेराव करेंगे।

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