
9 प्रत्याशी इस बार हैं मैदान में
तरूण मिश्रा
कोरबा। अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए सुरक्षित जिले के पाली-तानाखार विधानसभा क्षेत्र संख्या 23 में अब तक की स्थिति को लेकर कहा जा रहा है कि मतदाताओं ने जो मन बनाया है, उससे असली मुकाबला भारतीय जनता पार्टी और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के बीच होता नजर आ रहा है। कई तरह के विवाद में फंसे निवर्तमान विधायक मोहितराम केरकेट्टा का टिकट काटने बाद कांग्रेस ने दुलेश्वरी सिदार को मैदान में उतारा है। हालात ऐसे बने हैं कि भाजपा और गोंगपा के बीच संघर्ष मेें कांग्रेस फंसी हुई है।
आदिवासियों की कई श्रेणियों वाली विधानसभा पाली-तानाखार में दूसरे वर्ग के मतदाता भी हजारों की संख्या में है। नामांकन पत्रों की जांच और वापसी के बाद यहां 9 प्रत्याशी मैदान में रह गए हैं। इनमें से बाकी निर्दलीय है, जबकि मुख्य रूप से भाजपा के प्रत्याशी और पूर्व में विधायक रह चुके रामदयाल उइके, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष तुलेश्वर सिंह मरकाम और कांग्रेस की दुलेश्वरी सिदार सामने है। जिला पंचायत अध्यक्ष शिवकला कंवर के पति और कटघोरा विकासखंड के धनरास पंचायत से सरपंच छत्रपाल सिंह कंवर ने काफी समय तक यहां से कांग्रेस का टिकट हासिल करने के लिए प्रयास किया। उच्चस्तर पर भागदौड़ करने के बाद भी उनके हाथ खाली रहे और आखिरकार कांग्रेस समर्थित जिला पंचायत अध्यक्ष के पति को जनता कांग्रेस जोगी की तरफ से प्रत्याशी के बतौर मैदान में उतरना पड़ा। इन सबके बावजूद विधानसभा क्षेत्र में लगातार भ्रमण करने और यहां की नब्ज को बेहतरी से जानने वाले लोग इस बात को स्वीकार करते हैं कि तमाम तरह के समीकरणों के बाद भी इस बार समीकरण काफी बदले हुए हैं। इसके पीछे अपने-अपने आधार है और इसी को लेकर यह बात कही जा रही है कि पाली-तानाखार में वर्ष 2023 का विधानसभा चुनाव भाजपा और गोंगपा के बीच हो रहा है। अगर यहां पर कांग्रेस प्रत्याशी तीसरे नंबर पर आ जाएं तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए। इसमें भी एक बात यह भी है कि जनता कांग्रेस के प्रत्याशी और लंबे समय से आदिवासी मामलों को लेकर मुखरता के साथ बात उठा रहे छत्रपाल सिंह कंवर समुदाय के वोटों में सेंध लगाने में सफल होते हैं तो, नतीजे और भी ज्यादा प्रभावित होंगे। सक्रियता रही उइके की, गोंगपा के साथ अनुकूलता
बताया जा रहा है कि मरवाही के बाद पाली तानाखार से विधायक रह चुके रामदयाल उइके ने पिछला चुनाव भाजपा से लड़ा। समय कम होने के कारण वे अपने चुनाव चिन्ह के साथ पूरे इलाके में नहीं पहुंच सके, लेकिन अब बात वैसी नहीं है। पिछला चुनाव हारने के बावजूद उइके ने पूरे पांच साल इलाके में लगातार अपनी उपस्थिति बनाए रखी और लोगों के संपर्क में निरंतर रहकर जता दिया कि इलाके से उनका जुड़ाव कम नहीं हुआ है। इस बार समय से पहले उनकी सक्रियता और पहले से इलाके के भूगोल और गणित को समझने की नीति काफी कारगर साबित हो रही है। दूसरी ओर गोड़वाना गणतंत्र पार्टी के पूर्व अध्यक्ष हीरासिंह मरकाम के अवसान के बाद उनके पुत्र यहां से मैदान में हैं। जातीय समीकरणों के कारण यहां से गोंगपा को अच्छी उम्मीद है और इसलिए मुकाबले को कांटेभरा माना जा रहा है।
दुलेश्वरी लड़ रही या…
विधानसभा क्षेत्र में इस बात का हल्ला ज्यादा है कि पाली-तानाखार से प्रतीक के तौर पर दुलेश्वरी सिदार चुनाव मैदान में है लेकिन असली लड़ाई उत्तर प्रदेश के एक नेता की है। दरअसल उनकी ही खास दखल के कारण जनपद पंचायत पाली के अध्यक्ष को इस विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस का टिकट संभव हुआ है। कहा तो यह भी जा रहा है कि इसी नेता के चक्क र में इस बार मोहितराम केरकेट्टा का टिकट कटा है। इसकी पूरी जानकारी संबंधित लोगों को है। ऐसे में वे लोग चुनाव को बहुत ज्यादा भाव देने के मूड में नहीं है। चर्चा यह भी है कि ऐसी कोई कोशीश न की जाए जिससे दूसरे प्रदेश के नेता की राजनैतिक स्थिति इस क्षेत्र में और मजबूत हो। वहीं इलाके के लोग इस बात को खास तौर पर कहने से नहीं चूकते कि मोहितराम का पांच साल का कार्यकाल विधायक के तौर पर कुछ नेताओं और कारोबारियों तक ही सिमट कर रह गया।
2 लाख 28 हजार मतदाताओं के लिए 300 पोलिंग बूथ
पाली-तानाखार विधानसभा क्षेत्र में पुनरीक्षण के बाद 2लाख 28 हजार 351 वैध मतदाता हैं। इनमें से महिला मतदाताओं की संख्या 1, 14, 915 हैं, जबकि इनके मुकाबले पुरूष मतदाता की संख्या 1,13, 428 है। विधानसभा क्षेत्र में थर्ड जेंडर श्रेणी के 8 मतदाता मौजूद हैं। क्षेत्र में मतदान के लिए कुल 300 मतदान केन्द्र बनाए गए हैं। इनमें से 295 ग्रामीण और पांच शहरी क्षेत्र में है।
हरिशंकर पैकरा
एसडीएम, पोड़ीउपरोड़ा



















