पिकअप में जानवरों की तरह भरी जा रही सवारियां

जांजगीर-चांपा। मालवाहक वाहन में सवारी यानी हादसे को न्योता देना हैं। लगातार हादसे के बाद भी जांजगीर-चांपा जिले के लोगों की आंखें नहीं खुली है। सुबह से लेकर शाम तक ऐसे दर्जनों वाहनों को शहर के बीचों बीच गुजरते देखा जा सकता है। चौक-चौराहों में तैनात पुलिस के सफेदपोशो जवानी को ऐसे बाहनों के खिलाफ कार्रवाई करने की बजाए आंख मूंदे बैठी रहती है। क्योंकि उन्हें कार्रवाई का अधिकार नहीं रहता। ऐसे वाहनों पर केवल टीआई या एसआई ही कार्रवाई कर सकते हैं। जिसके चलते ऐसे वाहन बेखौफ दौड़ते हैं। गरीबी के फेर में लोग सवारी बसें किराए में नहीं कर पाते। आखिरकार उन्हें ऐसे वाहन किराए में लेना पड़ता है और वे हादसे के शिकार हो जाते हैं। लगातार मौतों के बाद भी लोगों को समझ नहीं आ रही है। यातायात पुलिस हर रोज मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कार्रवाई कर रही है। खासकर इन दिनों मोटर व्हीकल एक्ट को लेकर सख्ती बरती जा रही है। समन शुल्क के रूप में हर रोज 12 से 15 हजार रुपए समन शुल्क के रूप में वसूल किया जा रहा। वहीं गौर करने लायक बात यह है कि मालवाहन वाहनों में सवारी ढोने वाले वाहन यूंही छोड़े जा रहे हैं। बावजूद जिले के लोगों में समझ नाम की चीज नहीं है। सुबह से लेकर शाम तक दोपहिया वाहनों में तीन सवारी। बिना कागजात वाले वाहन चालकों की संख्या कम होने का नाम नहीं ले रहा। ऐसे वाहन चालकों के हर रोज अभियान छेड़ा जाता है। खासकर बेतरतीब पार्किंग को लेकर हर रोज सख्ती बरती जा रही है। बावजूद लोगों में समझ नहीं आ रही है। लोगों को जागरूक होना होगा। तभी हादसे में विराम लगना चाहिए। 100-200 रुपए का खेल यातायात पुलिस की कार्यप्रणाली पर हमेशा सवाल खड़ा होते रहता है। ऐसा नहीं है कि ऐसे वाहन यातायात पुलिस की नजर में नहीं पड़ते है। यातायात पुलिस ऐसे वाहनों को रोकती जरूर है, लेकिन 100-200 रुपए लेकर चलता कर देती है। इसके कारण आए दिन इस तरह की घटना होते रहती है। यदि ऐसे वाहनों पर कड़ी कार्रवाई हो तो नि:शंदेह लोगों में समझ आएगी। लोग पुलिसिया कार्रवाई से डरेंगे।

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