
सूरजपुर। जिले के हाथी पुनर्वास केंद्र रमकोला में सोमवार को विश्व हाथी दिवस अनूठे तरीके से मनाया गया। सुबह हाथियों को स्नान कराया गया। उनकी परंपरागत तरीके से साज-सज्जा की गई। पूजा-अर्चना के बाद उन्हें पसंदीदा खाद्य सामग्री दी गई। सोमवार को पुर्नवास केंद्र का दरवाजा आमजनों के लिए भी खुला रहा। सुबह से शाम तक लोग यहां हाथियों को करीब से देखने पहुंचते रहे। स्कूली बच्चों के बीच हाथियों से जुड़ी सामान्य जानकारियों पर आधारित क्विज प्रतियोगिता भी हुई। विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कृत भी किया गया। कार्यक्रम में अतिथि के रूप में प्रतापपुर विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते भी शामिल हुई। उन्होंने हाथियों की पूजा कर अपने हाथों से लजीज व्यंजन भी परोसा। पुनर्वास केंद्र में हाथियों के लिए उनका पसंदीदा तरबूज, गन्ना, पपीता, अनानास, केला, कटहल, नारियल, खिचड़ी, मिठाई, गुड़ की व्यवस्था की गई थी। मालूम हो कि हाथियों के संरक्षण की दिशा में आम लोगों को जागरूक करने के लिए प्रतिवर्ष 12 अगस्त को हाथी दिवस मनाया जाता है। रमकोला का हाथी पुर्नवास केंद्र , छत्तीसगढ़ का इकलौता केंद्र हैं। यहां कर्नाटक से लाए गए प्रशिक्षित हाथियों को रखा गया है। रमकोला के घने जंगलों के बीच हाथी पुनर्वास केंद्र संचालित किया जा रहा है। विश्व हाथी दिवस के अवसर पर रमकोला के पुनर्वास केंद्र में आयोजित कार्यक्रम के दौरान हाथी के दो बच्चों ने सभी को आकर्षित और रोमांचित किया। कर्नाटक से लाई गई प्रशिक्षित हथिनी गंगा व योगलक्ष्मी ने लगभग एक माह पहले इन्हें जन्म दिया है। हाथी के इन दोनों बच्चों की भी साज – सज्जा की गई थी। कर्नाटक से लाए गए दो प्रशिक्षित हाथियों को अंबिकापुर शहर से लगभग 12 किलोमीटर दूर चेन्द्रा में लाकर रखा गया है। इन दोनों हाथियों को एक गुस्सैल हाथी को काबू करने के आपरेशन में लगाया जाएगा। इस हाथी ने सरगुजा में एक तथा जशपुर में चार लोगों की कुचल कर जान ली है। सोमवार को हाथी दिवस होने के कारण प्रशिक्षित हाथियों को आपरेशन में नहीं लगाया गया।





















