पूरी ताकत से कुचल दें आतंकवाद का फन

कोरबा। जम्मू कश्मीर में कई प्रकार के बदलाव करने के बाद ऐसा लग रहा था कि व्यापक हद तक आतंकी मामलों में सुधार होगा। लेकिन काफी अंतराल के बाद आतंकियों का सिर उठाना हाल में ही शुरू हो गया है। इसके पीछे राजनीतिक तस्वीर का बदलना भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है। राजौरी क्षेत्र में आतंकियों के द्वारा किये गए हमले में छत्तीसगढ़ के 10 यात्रियों की मौत और कई के घायल होने से पता चलता है कि आतंकी केवल गोली के भूखे हैं। भारतीय सेना के द्वारा पिछले वर्षों में जम्मू कश्मीर क्षेत्र में की गई जबरदस्त कार्रवाई के कारण पत्थरबाज गैंग बेरोजगार हो गई है और आतंकियों के संरक्षकों की दुकानें भी ठप पड़ गई है। पिछले दिनों संपन्न लोकसभा चुनाव में कश्मीर इलाके की सीटों पर जिस प्रकार से एनएसए और अन्य धाराओं में रजिस्टर्ड कुख्यात चेहरों को जीत मिली है उससे भी आतंकी मानसिकता को एक तरह से संजीवनी प्राप्त हुई। ऐसे में उनकी विध्वंसक गतिविधियां तेज हो रही है। जम्मू-कश्मीर और पश्चिम बंगाल के हालात जिस प्रकार से बिगड़ रहे हैं वह कम से कम उन लोगों के लिए चिंता का विषय है जो देश को लेकर ठीकठाक मानसिकता रखते हैं। लोग अब मांग कर रहे हैं कि आतंकियों पर रहम करने के बजाय उनके ही अंदाज में निपटाने का काम हो और उनके संरक्षकों को भी ऐसा ही सबक मिले।
तीसरे कार्यकाल में हो ठोस काम
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले मंत्रीमंडल ने तीसरी बार शपथ ली है, यह देश के लिए गौरव का विषय है। हम चाहते हैं कि छत्तीसगढ़ के 10 यात्रियों की जो मृत्यु आतंकी हमले में हुई है, वह अत्यंत दर्दनाक है। धार्मिक पर्यटन के उद्देश्य से कहीं से भी जाने वाले लोग स्थान विशेष को फायदा ही पहुंचाते हैं। ऐसे में आतंकियों के कारनामे विषैले सर्प के समान है। सरकार इसके लिए ठोस काम करें।
जड़ से सफाया करना ही विकल्प
धरती के स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर में जिस प्रकार की ताकतें पिछले कुछ दिनों से मुंह उठा रही है वह न केवल चिंताजनक है बल्कि वह आने वाले समय के लिए बेहद गंभीर भी है। आतंकियों के द्वारा जनजीवन के लिए समस्या खड़ी करने और लोगों की हत्या करने का जो काम किया जा रहा है वह अक्षम्य है। उनका जड़ से सफाया होना चाहिए।
कठोर कार्रवाई की जरूरत
देशहित के लिए जरूरी है कि किसी भी हिस्से को अकारण अशांत करने की हरकतों में संलिप्त तत्वों के विरूद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। ऐसे मामलों में कथित मानव अधिकार कोई मायने नहीं रखता। जब तक इस तरफ सोचते रहेंगे काफी देर हो चुकी होगी। आतंकी किसी के सगे नहीं हो सकते, सरकार को इस नीति पर काम करना होगा।

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