
चरचा कालरी। राष्ट्रहित में अपनी जान जोखिम में डालकर रात दिन अथक परिश्रम कर अपना खून पसीना एक करने वाले कोयला मजदूरों का दुर्भाग्य है कि जब तक वह काम में रहते हैं तब तक उनकी पूछ परख होती है किंतु सेवानिवृत्ति होते ही कालरी प्रबंधन दूध में पड़ी मक्खी की तरह उन्हें निकाल फेंकता है इसका प्रत्यक्ष प्रमाण 65 वर्षीय बुजुर्ग आदिवासी महिला है जो पेंशन हेतु चरचा कालरी प्रबंधन कार्यालय का चक्कर लगाते लगाते थक गई किंतु कालरी के जिम्मेदार अधिकारियों को जरा भी रहम नहीं आई बुजुर्ग महिला के पति अमोल सिंह पिता दखलसाय चर्चा आर ओ के कर्मचारी थे जो 31 जुलाई 2013 को सेवा निवृत हो गए थे सेवानिवृत होने के पश्चात उन्हें पेंशन मिलता था किंतु 3 जुलाई 2020 को उनका आकस्मिक निधन हो गया पति की मृत्यु के बाद पेंशन हेतु उनकी पत्नी श्रीमती फुल सुंदरी ने तत्कालीन कार्मिक अधिकारियों के पास कई बार गुहार लगाई, बुजुर्ग महिला को अधिकारियों के द्वारा आश्वासन दिया जाता था कि जल्दी ही पेंशन चालू हो जाएगा किंतु कार्यालय के चक्कर लगाते लगाते 4 साल गुजर गए इसके बावजूद पेंशन प्रारंभ नहीं हो सका जबकि बुजुर्ग महिला ने समस्त आवश्यक दस्तावेज जमा कर दिए थे आवेदिका के द्वारा कार्मिक प्रबंधक चरचा कालरी के समझ लिखित आवेदन भी प्रस्तुत किया गया किंतु कार्मिक अधिकारी ने ना तो कोई जवाब दिया और न हीं कोई जानकारी दी पीडि़त महिला ने क्षेत्र के महाप्रबंधक से अपील की है कि उसकी बेहद दयनिय स्थिति स्थिति को दृष्टिगत करते हुए पेंशन प्रदान करें जिससे वह किसी तरह अपनी आजीविका चला सके।


















