
जांजगीर। रक्षाबंधन का पर्व भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखता है, लेकिन ग्लोबल वार्मिंग के इस दौर में जिला मुख्यालय से करीब 18 किलोमीटर दूर बहेराडीह की महिलाएं पर्यावरण संरक्षण के लिए पेड़-पौधों को अपना भाई मानकर उन्हें राखी बांधते हुए इस रिश्ते को एक नया आयाम दे रही हैं। गांव की महिलाएं पिछले तीन साल से रक्षाबंधन पर्व पर पेड़ों के तने व टहनियों पर राखी बांधकर त्योहार मना रही हैं। बहेराडीह बिहान समूह व गांव की अन्य महिलाओं का मानना है कि जिस प्रकार भाई अपनी बहनों की रक्षा करते हैं। उसी प्रकार पेड़ भी निरंतन सभी को आक्सीजन देकर सभी की रक्षा कर रहे हैं। इसलिए वे इस तरह से पेड़ को राखी बांध कर पर्यावरण संरक्षण का लोगों को संदेश दे रही हैं। महिलाओं ने पेड़-पौधों के संरक्षण से जोडऩे का विचार बनाया गया, ताकि पर्यावरण का संरक्षण करने के लिए लोग और भी ज्यादा प्रेरित हों। महिलाओं ने बहेराडीह किसान स्कूल के पास और 18 अगस्त को पेड़ के तने पर राखी बांधी। इको फ्रेंडली राखी का उपयोग बहेराडीह किसान स्कूल के संचालक दीनदयाल यादव ने बताया कि पिछले तीन साल से आयोजन किया जा रहा है। महिलाओं ने अपने हाथों से केला, भिंडी, कमल सहित अन्य सब्जी के रेशे से धागा और इको फ्रेंडली राखी बनाई है। पेड़ के तनों की सुरक्षा को ध्यान रखते हुए इसे तैयार किया जाता है।












