
विधायक पुरुषोत्तम कंवर के समर्थकों को मायूस होना पड़ा इलाके में
-राजनीतिक संवाददाता-
कोरबा। ऐसा लगता है कि अबकी बार कटघोरा विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक बयार की दिशा कुछ सही नहीं है। इसके अलग-अलग कारण हो सकते हैं। चुनावी सीजन में इस तरह के नजारे भी सामने आ रहे हैं। सबसे हैरान करने वाली बात ये है कि वायु प्रदूषण से जुड़ी समस्या के मसले पर दीपका एसईसीएल क्षेत्र की ऊर्जानगर कालोनी में कांग्रेस प्रत्याशी के बहिष्कार वाले पोस्टर लग गए हैं और लोग खुलेआम इस बात को कह रहे हैं कि उन्हें वोट के बारे में बेहद गंभीरता से निर्णय लेना होगा।
चुनाव प्रचार के दौरान मंगलवार की रात्रि ऊर्जानगर कालोनी में पहुंचे कांग्रेस समर्थकों को लोगों की जलीकटी बात सुननी पड़ी और फिर बेहद निराश मन से लौटना पड़ा। खबर के मुताबिक स्थानीय विधायक पुरुषोत्तम कंवर जो कि इस विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के प्रत्याशी भी हैं, का प्रचार करने के लिए यूथ विंग से संबंधित विशाल शुक्ला और उनकी टीम ऊर्जानगर में घूम रही थी। उनका उद्देश्य अपने प्रत्याशी के लिए कालोवासियों से समर्थन जुटाने का था लेकिन यहां तो तस्वीर ही कुछ दूसरी थी। प्रचार करने आई टीम यह देखकर काफी अचकचाई कि कई आवासों के बाहर प्रत्याशी के बहिष्कार और हाय-हाय वाले नारे लिखे हुए हैं। उनमें कोल डस्ट और प्रदूषण की समस्या को हल नहीं करने को लेकर नाराजगी का भी जिक्र था। बात केवल यहां पर ही खत्म नहीं हुई। प्रचार कर रहे लोगों का सामना जब इस कालोनी के लोगों से हुआ तो स्थिति और बिगड़ी। लोगों का कहना था कि हमसे संपर्क करने में किसी का मुंह काला न हो जाए इसलिए प्रत्याशी सीधे तौर पर वोट मांगने इस इलाके में नहीं आ रहे हैं तो वे चुनाव के बाद कैसे मुंह दिखाएंगे। समस्याओं को लेकर लोगों ने खूब भड़ास निकाली और बिना किसी लाग-लपेट के कह दिया कि किसी भी कीमत पर इस इलाके से हमारे वोट कांग्रेस को मिलने से रहे। उन्होंने इसके साथ यह भी कहा कि वोट कहां जाएगा यह जल्द तय होगा। हमारे पत्ते कुछ घंटे पहले खुलेंगे। इसके लिए कई आधार हमारे पास हैं। इतना सब सुनाने के बाद कांग्रेस के मैदानी अमले को उन्होंने चलता कर दिया। जानकारी के मुताबिक न केवल ऊर्जानगर बल्कि कई और क्षेत्रों में कोल डस्ट के साथ-साथ दूसरे मुद्दों को लेकर प्रत्याशी के बहिष्कार वाले पोस्टर लगे हुए हैं। नागरिक बताते हैं कि बीते कई दशक में इस तरह का यह पहला अवसर है जब बुनियादी समस्याओं के ठोस समाधान नहीं करने व उदासीनता दिखाने को लेकर लोकतंत्र के त्योहार से ठीक पहले किसी क्षेत्र के नागरिकों ने प्रमुख राजनीतिक दल के प्रत्याशी के बहिष्कार की घोषणा की। कोलफील्ड्स में इस तरह के घटनाक्रम को राजनीतिक जागरूकता के तौर भी देखा जा रहा है। जिस अंदाज में चुनावी सीजन में इस प्रकार की घटनाएं हो रही है उसने कम से कम राजनीतिक दलों के नेताओं से लेकर उनके लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं की परेशानी तो बढ़ा ही दी है।
कई इलाकों में लोगों ने चुनाव बहिष्कार का ऐलान किया
इससे पहले जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों से समस्याओं को लेकर लोगों ने नाराजगी जताने के साथ दूसरे चरण में 17 नवंबर को होने वाले मतदान के बहिष्कार की घोषणा की। सबसे पहले इसकी शुरुआत पंडो जनजाति की उपस्थिति वाले विकासखंड कोरबा के एक गांव से हुई। मामला मीडिया में छाने के बाद आनन-फानन में प्रशासन की वहां पहुंच हुई और किसी तरह लोगों को मनाने का प्रयास हुआ। पाली विकासखंड की बतरा पंचायत के महुआ गांव के लोगों ने पक्की सडक़ की कमी से होने वाली समस्याओं को लेकर मतदान का बहिष्कार करना तय किया है। इस कड़ी में कुछ और गांव शामिल हैं जहां के लोगों ने प्रशासन को अपने इरादे से अवगत करा दिया है।
















