
जांजगीर चांपा। छत्तीसगढ़ निशक्त जन अधिकार समिति के प्रदेश अध्यक्ष राधाकृष्ण गोपाल ने फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट के सहारे नौकरी करने वाले के विरुद्ध कार्रवाई किए जाने की मांग कलेक्टर आकाश छिकारा से की है। वही इस आशय की शिकायत जिला शिक्षा अधिकारी से भी किया गया है परंतु जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा मामले को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।
शिकायतकर्ता ने अपने पत्र में कहा है कि फर्जी (गलत)द्विव्यांगता प्रमाण के आधार पर शासकीय नौकरी में लगे सुधेश सिंह चंदेल को बर्खास्त करने लायक है क्यों कि सुधेश कुमार सिंह चंदेल पिता स्व. मनहरण सिंह चंदेल जो कि ग्राम-लछनपुर, पोस्ट-झरना, विकासखण्ड-बम्हनीडीह, तहसील-चाम्पा का निवासी है। जो वर्तमान में विकासखण्ड-बम्हनीडीह के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला कुम्हारीकला में सहायक शिक्षक के पद पर रहते हुए सुधेश कुमार सिंह चंदेल विगत 1998 से 30 प्रतिशत दिव्यांगता प्रमाण पत्र फर्जी तौर पर बनवाकर शासकीय नौकरी का लाभ ले रहा है। चूंकि शासकीय नौकरी का लाभ लेने के लिये 40 प्रतिशत की दिव्यांगता अनिवार्य है। सुधेश कुमार सिंह चंदेल द्वारा पिछले 26 वर्षों से 30 प्रतिशत के फर्जी, गलत द्विव्यांगता (विकलांगता) प्रमाण के आधार पर शासकीय नौकरी करते हुए शासन को गुमराह किया जा रहा है, जो कि एक बहुत ही गंभीर अपराध है। सबसे ध्यान देने वाली बात यह है कि वह हाथ पैर से पूरी तरह से स्वस्थ है जो कि फर्जी तरीके से विकलांगता प्रमाण पत्र बनवाकर नौकरी हासिल कर लिए हैं सुधेश कुमार सिंह चंदेल के दिव्यांगता का भौतिक परीक्षण संभागीय मेडिकल बोर्ड से कराकर बर्खास्त किया जाना चाहिए।
यहां यह बताना आवश्यक है कि इस जिले में अनेक ऐसे लोग हैं जो फर्जी विकलांग सर्टिफिकेट के आधार पर नौकरी हासिल कर लिए हैं जो हाथ पैर से पूरी तरह से स्वस्थ होने के बावजूद भी चिकित्सको से सांठ गांठ कर फर्जी तरीके से नौकरी हासिल कर वास्तविक हकदारों का हक छीन लिए हैं ऐसे लोगों के ऊपर ठोस कार्रवाई करते हुए योग्य उम्मीदवारों को उनके स्थान पर नियुक्त किया जाना लोकहित में ही नहीं बल्कि सामाजिक हित में भी आवश्यक है,क्योंकि सामाजिक दृष्टि से दिव्यांग लोगों को समाज में स्थापित करने के लिए शासन स्तर पर ऐसी व्यवस्था दी गई है। जिसे अब हाथ पैर से स्वस्थ लोग फर्जी तरीके से हासिल कर इन्हें अपने अधिकारों से वंचित कर दिए हैं ऐसे फर्जी लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर उन्हे जेल भेजे जाने की सख्त आवश्यकता है।














