
कोरिया/बैकुंठपुर। कोरिया जिला मुख्यालय में बच्चों के मनोरंजन के लिए कोई खास व्यवस्था नहीं हो पाई है। बच्चों के लिए शहर में सिर्फ एक इंदिरा पार्क है। उसकी भी हालत खराब है। बच्चों के लिए पर्याप्त झूले भी नहीं हैं, जो हैं वे भी टूट चुके हैं। यहां दो फिसलपट्?टी, तीन झूले और छोटे बच्चों के लिए एक राउंड झूला लगा था। अब इनमें सिर्फ तीन झूले ही सही सलामत है।
घुड़ सवारी व राउंड झूला टूट चुका है। एक साल पहले भी पार्क की स्थिति यही थी। पालिका के अधिकारियों ने कहा था कि प्रस्ताव भेजा गया है। जैसे ही राशि स्वीकृत होती है, नए झूले लगाए जाएंगे पर एक साल बीतने के बावजूद पार्क की स्थिति में कोई सुधार नहीं हो पाया है। शहरवासी बच्चों को घुमाने के लिए पार्क तो ले जाते हैं, लेकिन यहां किसी भी तरह की सुविधा ना देख मायूस होकर लौटते हैं। बता दें कि इंदिरा पार्क के झूले और जानवरों की मूर्तियां टूट-फूट गई हैं। भालू के सिर को किसी ने तोड़ दिया है। वहीं, शेर की पूंछ कई सालों से टूटी पड़ी है। पार्क में लगाई गई लाइट्स को भी बदमाशों ने तोड़ दिया है। यहां खंभों पर लगी झालर बंद है। पार्क में नए झूले लगाने के लिए दो साल से नगर पालिका तैयारी कर रही है, पर झूले नहीं लग सके हैं।
प्रतिदिन 50 से 60 लोग पहुंच रहे
हालांकि, अभी गर्मी बढऩे के कारण पार्क में कम संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। दिनभर में 50-60 लोग ही पार्क में आ रहे हैं। पार्क दोपहर 4 से शाम 8 बजे तक खुला रहता है। जबकि दिसंबर, जनवरी व फरवरी में यहां 700 से ज्यादा टिकट तक बिकती है। यहां एक टिकट का शुल्क पांच रुपए है। बता दें कि मनोरंजन के अन्य साधन भी नहीं बढ़ाए जा रहे हैं। इससे पार्क में आने वाले छोटे बच्चे निराश हो रहे हैं। गर्मी की छुट्टियां शुरू होने वाली है। पार्क में सुविधाएं नहीं बढ़ाई गई तो बच्चों और उनके परिजनों को निराश होकर लौटना पड़ेगा। शुक्रवार शाम 4.30 बजे इंदिरा पार्क पहुंचे जितेंद्र, सोनाली, शिवा, मीनाक्षी ने कहा कि पार्क में बच्चों के झूले टूटे हुए हैं। इनकी मरम्मत की ओर नगर पालिका को ध्यान देने की जरूरत है। लाइट भी टूटे व बंद पड़े हैं। राममंदिर वाटिका में झूले पुराने हो चुके बिजली ऑफिस के सामने राममंदिर वाटिका के झूले भी पुराने हो चुके हैं। वाटिका में बच्चों के खेलने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं है। इससे बच्चे मायूस होकर लौट जाते हैं। जबकि वाटिका के आसपास रहवासी कॉलोनी है। कई लोग देेर शाम यहां टहलने के लिए आते हैं। वाटिका का सौंदर्यीकरण हो जाए और यहां झूले लग जाए तो बड़ी संख्या में लोग यहां आने लगेंगे।
झुमका तट से पार्क हटाया, मनोरंजन जैसा कुछ नहीं
झुमका बोट क्लब में बांध के तट पर एसईसीएल ने पार्क की स्थापना की थी। इसमें कुछ झूले टूट चुके थे। झुमका महोत्सव व सीएम कार्यक्रम को लेकर पार्क के झूलों को यहां से हटा दिया गया। इससे झुमका तट पर बच्चों के मनोरंजन के लिए कुछ भी नहीं बचा। बोटिंग महंगा होने के कारण कम परिवार ही इसका लुत्फ उठा पाते हैं। तट पर एकमात्र बड़ी मछली के अंदर फिश एक्वेरियम ही बना है।