बजट पर चार दिन किया श्रम, नहीं मिला बोलने का मौका

सांसद ज्योत्सना ने महिला पत्रकारों से संवाद में बताया सच
कोरबा। पंचवटी के नजदीक सरकारी बंगले में सांसद ज्योत्सना महंत ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर स्थानीय महिला पत्रकारों को आमंत्रित कर उनसे कई विषयों पर संवाद किया। यहां एक-दूसरे को समझने की कोशिश की गई। सांसद ने कहा कि मैं हमेशा दूसरों से सीखती हूं और लोग मुझसे सीखते हैं। इसी परिप्रेक्ष्य में पहली बार इस तरह की कोशिश की गई।
चर्चा सत्र का शुभारंभ राजश्री गुप्ते ने किया। उन्होंने संबंधित प्रसंग पर अपनी बात की और फिर सवालों का क्रम शुरु हुआ। बारी-बारी से सवाल किए गए और सांसद ज्योत्सना ने उनके जवाब दिए। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि कम से कम एक दिन महिलाओं को स्वतंत्रता दी गई है। निश्चित तौर पर उनकी भूमिका सभी क्षेत्र में है और वह समर्पण के साथ अपना काम कर रही है। यह कहना गलत नहीं होगा कि महिलाओं को आगे बढ़ाने में कई प्रकार की बाधाएं हैं और इसके पीछे यही एक कारण है कि समाज अभी भी पुरुष प्रधान है। महिलाओं को वे मौके नहीं मिल पा रहे हैं जिसकी वह हकदार है। सांसद ने बताया कि पंचायत से लेकर विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं को नेतृत्व तो दिया गया है लेकिन कई बार ऐसा देखने में आता है कि उनके अधिकारों को कहीं ना कहीं दबाया जा रहा है। इस तरह की स्थिति बदलनी चाहिए। सांसद ज्योत्सना ने कहा कि आवश्यकता इस बात की है कि शिक्षा पूरी करें और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना के साथ इस क्षेत्र में प्रवेश करें। सभी प्रकार के दबाव से मुक्त होने की भावना और महिलाओं के लिए बेहतर कुछ करने की इच्छा शक्ति होना सबसे जरूरी है। मध्यप्र्रदेश के विंध्य क्षेत्र में जन्मी सांसद ने बताया कि फ्रीडम फाइटर के परिवार में हम लोगों का जन्म हुआ। मिलिट्री के लोग भी परिवार में थी इसलिए स्वाभाविक रूप से अनुशासन की सीख मिली। हमने जाना की कोई छोटा बड़ा नहीं होता है। प्रथम बार सांसद निर्वाचित होने पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलना हुआ। वह भी मैंने बताया था कि सीधे रसोई घर से संसद का सफर पूरा हुआ है। उन्होंने बताया कि कक्षा प्रथम से एमएससी तक उन्होंने छोटे-बड़े कई काम किया और इसके लिए परिजनों से काफी सराहना मिली। बाद में हमें पता चला कि हमने जाने अनजाने में बहुत बड़ा काम कर दिया है। संसद की गतिविधियों को लेकर किए गए एक सवाल के जवाब में सांसद ज्योत्सना महंत ने बताया कि जो चीज टेलीविजन पर दिखाया जाता है वह एक हिस्सा होता है बहुत सारी चीज लोगों तक नहीं पहुंच पाती। उन्होंने बजट सत्र पर चर्चा को लेकर बताया कि विपक्ष की तरफ से उनका नाम फाइनल हो गया था और उन्होंने चार दिन मेहनत कर लेख लिखा लेकिन बाद में बोलने का मौका नहीं मिला। इसकी बहुत ज्यादा टीस मन में है। लोकतंत्र में जिस तरह की तस्वीर अभी बनी हुई है वह अजीब है और विपक्ष के लोगों को इसका मलाल है। गृहस्थ जीवन के साथ राजनीति के क्षेत्र में सफलता को लेकर समन्वय से जुड़े प्रश्न के बारे में उन्होंने कहा कि संकल्प से सिद्धि संभव है। अपने चार बच्चों का उदाहरण देते हुए उन्होंने अपनी बात को स्पष्ट किया और बताया कि हमने उन्हें अपने निर्णय के लिए स्वतंत्र कर दिया। महिलाएं अगर चाहे तो कोई भी काम असंभव नहीं। इस मौके पर निर्मला राठौर, आशा सिंह, प्रतिमा सरकार, सिमरन कौर, रजनी चौहान, भगवती भंडारी, लालिमा शुक्ला, रेणु जायसवाल, कृतिका सिंह, आशा कुमारी, वर्षा सिंह व अन्य उपस्थित थीं। अंत में सभी को आकर्षक गिफ्ट प्रदान किए गए। इस मौके पर प्रेस क्लब अध्यक्ष राजेंद्र जायसवाल की उपस्थिति रही।

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