बदलाव की बयार में नहीं टीक सके कोई भी पुराने चेहरे,मिली करारी हार

कोरबा । जिले में मतगणना का अंतिम चक्र पूरा होते ही परिणाम की घोषणा हो गई है भाजपा के लखनलाल देवांगन ने एक बड़ी जीत हासिल कर 15 साल बाद कोरबा में भाजपा को काबिज किया है । लखनलाल ने कांग्रेस के उम्मीदवार जयसिंह अग्रवाल को 25729 वोटों से शिकस्त दी है । कांग्रेस की लाज चार सीटों में से एकमात्र रामपुर में बची है और फूलसिंह राठिया ने कद्दावर भाजपा नेता ननकीराम कंवर को 22862 वोटों से हराया है । इसी तरह कटघोरा विधानसभा में कांग्रेस के पुरुषोत्तम कंवर को हराकर भाजपा के प्रेमचंद पटेल ने 17234 वोटों से चुनाव जीत लिया है । पाली-तानाखार विधानसभा में कांग्रेस और भाजपा पर गोंड़वाना गणतंत्र पार्टी की आरी खूब चली है और तुलेश्वर हीरासिंह मरकाम ने काफी कांटे की टक्कर में कांग्रेस को परास्त कर चुनाव जीत लिया है । यहां जीत का अंतर 714 वोटों का है जबकि जीत का दावा करके दिल्ली से टिकट लाने वाले भाजपा के रामदयाल उईके फिर से तीसरे नंबर पर खिसक गए हैं ।
जिले की चार विधानसभा क्षेत्र से प्रमुख पार्टी कांग्रेस, भाजपा और गोंगपा से 4 प्रत्याशी ऐसे थे जिन्होंने पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ा औऱ 3 प्रत्याशियों को जनता ने जीता दिया।चुनाव जीतने वाले नये चेहरे में रामपुर से फूलसिंह कंवर(कांग्रेस),कटघोरा से प्रेमचंद पटेल(भाजपा) औऱ पाली तानाख़ार से तुलेश्वर मरकाम(गोंगपा)का नाम शामिल हैं।
तानाखार सीट से चौथा नया चेहरा कांग्रेस की दिलेश्वरी सिदार जो करीब 776 वोट से चुनाव हार गई।वहीं पुराने चेहरे ननकीराम कंवर (भाजपा), जयसिंह अग्रवाल (कांग्रेस),र ामदयाल उईके (भाजपा),लखनलाल देवांगन (भाजपा)और पुरुषोत्तम कंवर (कांग्रेस) पार्टी प्रत्याशी के रूप में अपनी किस्मत आजमाने मैदान उतरे इनमें लखन देवांगन को छोडक़र बाकी सभी को जनता ने नकार दिया। हाई प्रोफाइल सीट कोरबा से प्रदेश के राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल को पूर्व महापौर लखनलाल देवांगन ने करीब 25,806 वोट से हराकर इस सीट पर पहली बार भाजपा का खाता खोलने में सफल हुए हैं।विधानसभा सीट कोरबा अस्तित्व में आने के बाद से वर्ष2008,वर्ष 2013 और वर्ष 2018 का चुनाव कांग्रेस के जयसिंह अग्रवाल ने चुनाव जीता।वर्ष 2018 में राज्य की 90 सीट में 68 सीट जीत कर प्रचंड बहुमत से कांग्रेस की सरकार बनी। जयसिंह अग्रवाल सरकार में राजस्वमंत्री बनाये गए।इसी प्रकार कटघोरा से मौजूदा विधायक लखनलाल देवांगन अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी पुरुषोत्तम कंवर से चुनाव हार गए । रामपुर से ननकीराम कंवर औऱ तानाख़ार से मोहित केरकेट्टा ने चुनाव जीता।कंवर और केरकेट्टा पहली बार विधायक बने। वर्ष2023 के विधानसभा में कांग्रेस ने केरकेट्टा की टिकट काटकर दिलेश्वरी सिदार को टिकट दी थी। इसी वर्ष 3 पुराने चेहरे बम फाड़ वोट से हारे इसके पीछे जनता की नाराजगी अपने क्षेत्र के विधायक से रही।एक तरफ जनता नाराज थी तो दूसरी तरफ असंतुष्ट नेता ओर कार्यकर्ताओं ने आग में घी डालने का काम किया और अपने ही पार्टी के प्रत्याशी को भारी नुकसान पहुचाया,जिसकी कल्पना नहीं कि जा सकती।वैसे पूरे प्रदेश में कांग्रेस के खिलाफ लहर चली ऐसा कहा जाता हैं और इस लहर की चपेट में कोरबा जिला भी आ गया पहले कांग्रेस के कब्जे में तीन सीट कोरबा,कटघोरा और तानाखार थी वहीं भाजपा के पास एकमात्र रामपुर सीट थी। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस केवल रामपुर सीट ही जीत पाई।भाजपा ने दो कोरबा व कटघोरा सीट पर जीत दर्ज की वहीं तानाखार सीट पर गोंगपा का कब्जा हो गया।
लखन की बड़ी जीत में ये बनें सारथी कोरबा जिले की खास और महत्वपूर्ण विधानसभा कोरबा की सीट पर आखिरकार लखनलाल देवांगन ने 1000-2000 नहीं बल्कि 25629 मतों से बड़ी और ऐतिहासिक जीत हासिल की है। लखनलाल देवांगन के सिर पर जीत का सेहरा सज गया है और अपने सीधे-सरल-सहज व्यक्तित्व से वन-टू- का फोर कर चुके हैं। माय नेम इज लखनज्..के गानों की गूंज समर्थकों का उत्साह बढ़ा रही है। किसी प्रत्याशी की जीत में टिकट फाइनल होने से लेकर पूरे चुनाव के दौरान उसके लिए की जाने वाली जमीनी मेहनत ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। लखन लाल देवांगन के विजय रथ में दो नाम शुरू से सारथी के तौर पर चर्चित रहे और इन्होंने जब-जब कमान संभाली, लखनलाल को जीत का स्वाद चखाया। जोगेश लाम्बा की कुशल रणनीति ने महापौर तो अशोक चावलानी ने कटघोरा का विधायक बनवाया।
भाजपा में प्रदेश कार्यसमिति सदस्य अशोक चावलानी और जोगेश लाम्बा की जोड़ी ने अपने प्रदेश उपाध्यक्ष को फिर विधायक बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
चुनाव के दौरान हुई इस बात को नकारा नहीं जा सकता और यह आंतरिक कटु सत्य भी है कि लखन लाल की जमीन कमजोर करने के लिए चुनिंदा लोग कोरबा छोड़ मनेन्द्रगढ़ में शिफ्ट हो गए थे,यहां तक कि पार्टी कार्यालय के कम्प्यूटर ऑपरेटर तक को साथ ले गए। युवा नेता की अगुवाई में उसकी टीम मनेन्द्रगढ़ में लगी रही तो यहां लखन के हालात डगमगाने लगे थे। युवा मोर्चा की भी टीम शुरुआत में गायब रही। आम लोगों के बीच से यह बात भी निकली की लखन का प्रचार कमजोर है,प्रचार की कछुआ चाल है, कहीं भीड़ नहीं, शोर-शराबा नहीं है,और भी न जाने क्या-क्याज्।
इधर संगठन ने काफी विचार कर अशोक चावलानी को लखन का चुनाव संचालक बनाया तो लगने लगा कि अब नैया पार लगेगी। संचालक बनने के बाद चावलानी की रणनीति और जोगेश लाम्बा का बूथ मैनेजमेंट, वार्डो में सक्रिय टीम का गठन से लेकर गली मोहल्ले,घर-घर जाकर प्रचार ने जोर पकड़ा। लखन देवांगन भी खुद जमीनी और विश्वासी कार्यकर्ताओं, महिला मोर्चा के साथ सघन जनसम्पर्क में लगे रहे। महापौर रहते कराए गए कार्यों और 15 साल की नाकामियों को जनता के बीच रखने का काम जोगेश ने भी किया तो चावलानी ने सामाजिक संगठनों में लखन के लिए पकड़ मजबूत की। चावलानी पर तोहमत भी लगे,कटाक्ष ने भी विचलित किया पर वे अपने अभियान में डटे रहे।इधर जब ऊपर से हालातों की रिपोर्टिंग ली गयी तब सच जानकर शीर्ष नेतृत्व ने डण्डा घुमाया और मनेन्द्रगढ़ का बहाना कर गई हुई टीम ने अंतिम दौर में वापसी की, यह न होता तो गाज गिरना तय था इस बात से वो भी वाकिफ रहे। दूसरी तरफ जोगेश लाम्बा,अशोक चावलानी के साथ गोपाल मोदी, नवीन पटेल, अमित नवरंगलाल आदि ने मिलकर अंदरूनी तौर पर काम जारी रखा। गोपाल मोदी ने रामपुर के साथ-साथ कोरबा में भी जिम्मेदारी निभाई। लखन के लिए माहौल बनाने जिलाध्यक्ष ने गृहमंत्री अमित शाह सहित यूपी-बिहार के मंत्री,विधायक, डिप्टी सीएम तक की सभा करा दी।वरिष्ठों की एका और कनिष्ठों के टीम वर्क व परिवर्तन की लहर के साथ क्षेत्रीय मुद्दों ने भाजपा की जीत के अंतर को बहुत बड़ा कर दिखाया।

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