
बागेश्वर, ३१ जुलाई । हिमालयी गांवों में रुक-रुक वर्षा का दौर चल रहा है। बिजली, पानी, सड़क, संचार आदि सुविधाएं पटरी से उतर रही हैं। गांवों को जोडऩे वाली सड़कें और रास्ते मलबे में तब्दील हो चुके हैं। पिछले पांच दिनों से नौ सड़कें बंद हैं। जिससे 10 हजार से अधिक जनसंख्या प्रभावित है। हालांकि सड़कों को खोलने के लिए लोडर मशीनें लगाई गई हैं। रविवार की सुबह हल्के बादल छाए रहे और दिन भर चटक धूप रही। जिसके कारण उमस भरी गर्मी पड़ी। शाम होते ही फिर बादलों से आसमान ढक गया। हिमालय की तलहटी वाले गांवों में बूंदाबांदी की सूचना है। सरयू नदी में सिल्ट आने से पेयजल की समस्या बनी हुई है।वहीं, मलबा और बोल्डर गिरने से सातचौरा-जल्थाकोट किमी दो, तीन, कंधार-रौल्याना किमी सात, भानी-हरसिंग्याबगड़ किमी दो, कठपुडिय़ाछीना-सेराघाट किमी एक और पांच, काफलीकमेड़ा किमी चार, सूपी-झूनी किमी तीन और छह, भनार-लाथी-नामतीचेटाबगड़, भयूं-गुलेर आदि मोटर मार्ग पिछले पांच दिनों से बंद हैं। जिसके कारण लगभग दस हजार से अधिक जनसंख्या प्रभावित हो रही है।वहीं, कपकोट-कर्मी मोटर मार्ग में जगह-जगह भूस्खलन हुआ है। जिसके कारण सड़क पर यातायात प्रभावित है। सड़क को खोलने के लिए लोडर मशीन लगाई गई है। स्थानीय निवासी मुन्ना कपकोटी ने बताया कि शाम तक सड़क खुलने की संभावना है। इधर, जिला आपदा अधिकारी ने कहा कि सड़कों को खोलने के लिए लोडर मशीनें लगाई गई हैं। जिला मुख्यालय में सुबह 12 बजे बाद एकाएक बिजली कट गई। पांच बजे बाद भी नहीं आई। जिससे लोग उमस भरी गर्मी से परेशान रहे। बिना वर्षा के घंटों कटौती पर लोगों में आक्रोश है। फ्रिज में रखा सामान खराब हो गया। आइसक्रीम आदि गल गई। पंखे, एसी आदि भी शोपीस में तब्दील हो चुके हैं। इधर, अधिशासी अभियंता ऊर्जा निगम मोहम्मद अफजाल ने बताया कि तकनीकी खराबी को दुरुस्त किया जा रहा है।



























