
जांजगीर-चांपा। बाजारों में अमानक,खाद और कीटनाशक धड़ल्ले से बिक रही है। सैंपल लेकर जांच में इसका खुलासा भी हो रहा है लेकिन इससे किसानों को किसी तरह फायदा होता नजर नहीं आ रहा। क्योंकि जब तक सैंपलों की रिपोर्ट आती है जब तक अमानक खाद, बीज और कीटनाशक दवा तो बाजार में खप चुकी होती है,किसान उसे खरीदकर उपयोग भी कर चुके होते हैं। इधर कार्रवाई के नाम पर विभाग यह दलील देता है कि अमानक निकले खाद, बीज और कीटनाशक दवाओं दिया की बिक्री पर हमने प्रतिबंध लगा। है। मगर अधिकांश मामलों में प्रतिबंध लगाए गए अमानक खाद, बीज और कीटनाशक तो खप चुके होते हैं। गौरतलब है कि खरीफ सीजन 2022-23 में कृषि विभाग के द्वारा जिलेभर में निजी खाद-बीज उर्वरक और सोसायटियों में जांच अभियान चलाकर सैंपल लेने की कार्रवाई की गई। इनमें बीज का 115 सैंपल लिए गए। इनमें से एक बीज का संपल जांच में अमानक निकला। जो सेवा सहकारी समिति खैजा का था। लेकिन तब तक इसकी रिपोर्ट आई, यह बीज किसानों को दिया जा चुका था। इसी तरह उर्वरक (खाद) का 128 नमूना जांच के लिए लिया गया। इनमें से से किसान खाद भंडार पामगढ़ और कश्यप कृषि केंद्र पिसौद से लिया गया उर्वरक का नमूना अमानक निकला। इसी तरह जिले में क्रीटनाशक दवाओं का 47 नमूना जांच कृषि विभाग के द्वारा हर साल निजी लेकिन बड़ी बात यही है कि दुकानों और सोसायटियों में जाकर खाद, बीज और कीटनाशक दवाओं की जांच करता है। इस दौरान संदेह होने पर खाद, बीज और कीटनाशक दवा के नमूने लेकर जांच के लिए भेजता है। खरीफ और रबी सीजन दोनों में इस तरह के सैंपल लेकर जांच कराए जाते हैं इनमें से भी 4 कीटनाशक दवा का सैंपल जांच में अमानक निकला। अमानक निकलने के बाद भी किसी दुकान संचालक और सोसायटियों के ऊपर बड़ी कार्रवाई नहीं होती। क्योंकि जांच में अमानक निकलने वाले खाद, बीज और कीटनाशक के निर्माता वे नहीं रहते। ऐसे में स्थानीय विक्रेता बच जाते हैं। बड़ी कार्रवाई नहीं हो पाती। कृषि केंद्र बुंदेला, साहू कृषि केंद्र भंवतरा और कृष्णा कृषि केंद्र राहौद से लिए गए थे। रिपोर्ट प्राप्त होने पर कृषि विभाग के द्वारा उक्त अमानक को सही और कीटनाशक दवा के वितरण पर प्रतिबंध गुणवत्ता युग बाद बोज और लगा दिया गया था। जांजगीर चांपा जिले में खाद,उर्वरक, दवा एवं कृषि से संबंधित सामानों की करोड़ों रुपए की व्यवसाय प्रत्येक वर्ष हो जाता है जिसमें व्यापारी कृषि सीजन में सामान बेचकर लाभ अर्जन कर लेते हैं किंतु अमानत खाद, दवा के विक्रय का रिपोर्ट लेट से आने के कारण इसका लाभ किसानों को नहीं मिल पाता,बल्कि किसान अपनी फसल को बचाने के लिए कई बार खाद एवं दवाइयां को अपने खेतों में डालते रहते हैं ताकि फसल का बचाव किया जा सके किंतु इसमें किसानों की लागत कई गुनी अधिक बढ़ जाती है जिसके लिए अधिकारी वर्ग विशेष ध्यान नहीं देते। बल्कि यह व्यापारियों को लाभ पहुंचाने के लिए जानबूझकर लेट से सैंपल लेते हैं और उनका रिपोर्ट सीजन निकल जाने के बाद मंगाया जाता है।यह खेल लंबे समय से कृषि विभाग में विभागीय अधिकारियों के संरक्षण में चल रहा है जिसके कारण अधिकारी करोड़ों रुपए अंदर कर मालामाल हो रहे हैं। और किसान तंगहाली में जीवन जीने को मजबूर है
























