बारिश के सीजन में भी पानी की किल्लत है यहां

सूरजपुर। गांव में पानी की समस्या से परेशान होकर जंगल को अपना ठिकाना बनाने वाले ग्राम तेलाई पाट के ग्रामीणों के जीवन की कठिनाइयां बढ़ती जा रही है। बारिश में समस्या से तंग बलियारी जंगल को ग्रामीणों ने अपना ठिकाना बनाया हैं। ग्राम बलियारी सीमावर्ती ग्राम पंचायत रामगढ़ का आश्रित ग्राम है तथा संजय नेशनल पार्क के भीतर पहाड़ी पर बसा है। पहाड़ी पर विशेष संरक्षित जनजाति पण्डो समाज के 50 से अधिक परिवार दशकों से निवासरत हैं। प्रशासन द्वारा ग्रामीणों की सुविधा के लिए पहाड़ी पर प्राथमिक स्कूल संचालित किया जा रहा है, साथ ही अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही है। गांव का एक मात्र हैण्डपंप खराब हो जाने से परेशान ग्रामीणों ने वर्ष 2013 में अपना घर बार छोड़कर गुरूघासी नेशनल पार्क में नदी किनारे के जंगल को अपना बसेरा बनाया था। इसकी जानकारी मिलने पर वन अधिकारियों ने किसी तरह उन्हें वापस अपने गांव जाने के लिए राजी किया था। कुछ महीनों तक भीषण पेयजल समस्या से जूझने के बाद ग्रामीणों ने बलियारी जंगल में नदी के किनारे अपनी अस्थाई बस्ती बसा ली। ग्रामीणों ने अब जंगल की भूमि को खेत बना दिया है। नदी के पानी से सिंचाई कर अच्छी खेती कर रहे हैं। वन भूमि में वर्षों से निवासरत ग्रामीणों को वापस अपने गांव लौटने वन अधिकारी कई बार समझाईश दे चुके हैं। वन अधिकारियों की सख्ती के बाद कई ग्रामीण अपने गांव लौट गए हैं जबकि लगभग 35 परिवार अभी भी जंगल में ही रह रहे हैं। जंगल में पानी की कमी नहीं है लेकिन बरसात में ग्रामीणों को नदी का गंदा पानी पीना पड़ रहा है। ग्रामीणों को भी मालूम है कि वे वन भूमि में अतिक्रमण कर अपना गुजर-बसर कर रहे हैं लेकिन विभाग कभी भी उन्हें जंगल छोडऩे के लिए मजबूर कर सकता है। जंगल में प्रशासन उन्हें कोई भी सुविधा उपलब्ध नहीं करा सकता। ऐसी परिस्थितियों में बेहद कठिन जीवन जीने के बावजूद ग्रामीण अपने भविष्य का निर्णय नहीं कर पा रहे हैं। बलियारी जंगल में अपना भविष्य तलाश रहे ग्रामीण अपने बच्चों का भविष्य बिगड़ रहे है। जंगल के निकट स्कूल नहीं होने के कारण बच्चे पूरे दिन गृहस्थी के काम में लगे रहते हैं। शिक्षा के नाव में समुदाय के बच्चों का भविष्य खराब हो रहा है। तेलाईघाट में पहाड़ी पर प्राथमिक स्कूल खोला गया है लेकिन दूरस्थ क्षेत्र होने के कारण शिक्षक कम ही स्कूल पहुंचते हैं। पण्डो परिवार नदी का दूषित जल पीने को हैं मजबूर, जल जनित रोगों का बढ़ रहा खतरा दूरस्थ वनांचल क्षेत्र चांदनी- बिहारपुर में सूरज की तपिश प्रारंभ हो जाती है और क्षेत्र में पेयजल संकट गहराने लगता रामगढ़ के आश्रित ग्राम से राहत मिल बलियारी का मामला है। न तो लोगों को बरसात में पाती है और न ही पेयजल संकट से ही मुक्ति मिल पाती है। इससे वहां निवास करने वाले पण्डो जनजाति के लोग नदी नाले का दूषित पानी पीने के लिए मजबूर हो रहे हैं। मामला जिले के दूरस्थ वनांचल क्षेत्र चांदनी-बिहारपुर के ग्राम पंचायत रामगढ़ के आश्रित ग्राम तेलाईपाठ का है। जहां निवास करने वाले राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र पण्डो जनजाति के लोग सुविधाओं का अभाव होने से संकटग्रस्त जीवन जीने के लिए मजबूर हैं।

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