
(सीताराम नायक)
जांजगीर-चांपा। जांजगीर नैला शहर के हृदय स्थल पर स्थित बीडीएम उद्यान इन दिनों अपनी उपेक्षा का दंश झेल रहा है जहां कमीशन खोरी के लिए अनेक सुविधाएं तो उपलब्ध कराई गई है किंतु इसे बाद में सुरक्षित नहीं रखा जा रहा,नतीजा यह है कि यह उद्यान लगातार कबाड़ एवं गंदगी में तब्दील होने लगा है। यहां जनता की सुविधाओं के लिए लगाई गई कुर्सियों को भी ठीक नहीं किया जा रहा है जिसके कारण यहां घूमने आने वाले लोगों को बैठने तक की जगह नहीं मिल पा
रही है। विशेष कर बिसाहू दास महंत के नाम से स्थित इस उद्यान में उनके जन्मदिन एवं पुण्यतिथि पर ही विशेष कार्यों का संधारण किया जाता है जिसमे आर्थिक रूप से नगर पालिका को खोखला किया जाता है। नगर पालिका परिषद द्वारा जनता की सुविधाओं को ध्यान देने में जरा भी रुचि नहीं लिया जा रहा । सुबह घूमने आने वाले लोगों को यहां बैठने के लिए पर्याप्त कुर्सियां तक नहीं मिल पाती क्योंकि जिन कुर्सियों को यहां पर लगाया गया है उनमें से अधिकतर कुर्सियां टूट-फूट कर या तो खराब हो गई हैं या फिर सही जगह पर इसे लगाया नहीं गया है,कुर्सियों की पर्याप्त संख्या तक यहांनही है जिसके कारण इस उद्यान मे लोग अधिक समय तक नहीं ठहर पाते। एक जगह विशेष पर अनेकों की संख्या में कुर्सियां खाली ढेर पड़ी है परंतु इसे व्यवस्थित करने का फुर्सत किसी को नहीं है। जो अस्त,व्यस्तत स्थिति मे पड़ी हुई है लोग बैठने के लिए तरस रहे। चबूतरे तक की सफाई पालिका द्वारा नहीं कराया जाता।
अभी जुलाई का महीना है 23 जुलाई को बिसाहु दास महंत जी की पुण्यतिथि का आयोजन भी इसी उद्यान में किया जाता है इसी दौरान नगर पालिका के अध्यक्ष एवं नगर पालिका अधिकारी द्वारा लाखों रुपया खर्च कर आस्था दिखाने की कोशिश की जाती है परंतु इन आयोजनों के बाद पालिका के द्वारा इधर ध्यान नहीं दिया जाता और ना तो इस गार्डन की नियमित सफाई होती है और ना ही यहां टूटे-फूटे कुर्सियों का कभी संधारण किया जाता है नतीजा यह है कि टूट फूट के कारण यह उद्यान कबाड़ में तब्दील होने लगा है।
नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारी एवं नेताओं द्वारा यहां म्यूजिक सिस्टम भी लगाया गया है परंतु आज तक किसी भी व्यक्ति को इस उद्यान में म्यूजिक सुनने के लिए नहीं मिलता,क्योंकि इस सिस्टम को लगाने के लिए संबंधित एजेंसी द्वारा कमीशन जरूर दिया गया होगा परंतु इस म्यूजिक सिस्टम को सुनने के लिए लोगों की कान तरस गई है। बहुतों को तो यह भी नहीं मालूम कि यहां म्यूजिक सिस्टम लगा हुआ है। जबकि एक समय सुबह एवं शाम को घूमने आने वाले लोगों को भूले बिसरे गीतों के अलावा पुराने गीत व भक्ति गीतों का आनंद मिल जाता था। यह म्यूजिक सिस्टम शोपीस बन कर रह गई है । इस उद्यान मे कचरा डालने के लिए डस्टबिन लगाए गए हैं परंतु इन डस्टबिनों से लंबे समय तक कचरे को निकाला नहीं जाता ,यहां आने वाले लोगों को कचरे की सडऩ से नाक सिकुड़ कर भागना पड़ता है ऐसे में यहां जिम्मेदार जन प्रतिनिधियों की जनसेवा पर सवालिया निशान लगने लगा है। कहने को तो नगर पालिका परिषद में भगवान दास गढ़ेवाल अध्यक्ष के रूप में आसीन है किंतु उनके कार्यों का भगवान ही मालिक है जिन्होंने इस उद्यान में जन सुविधा को उपलब्ध कराने के लिए कभी भी अपनी रुचि नहीं दिखाई। सबसे ध्यान देने वाली बात यह है कि इस उद्यान के अंदर एक नल तक पानी पीने के लिए नहीं है अगर किसी वक्त लोगों को प्यास लग जाए या फिर घूमने फिरने वाले लोगों को कभी चक्कर आ जाए तो पानी के अभाव में वह उद्यान में ही दम तोड़ देगा। यहां पर फैलती गंदगी एवं जन सुविधाओं के अभाव के कारण अब लोग धीरे-धीरे इस उद्यान से दूर होने लगें हैं। कई बार कहने के बावजूद भी निर्वाचित जिम्मेदार लोगों का रवैया पूरी तरह से उदासीन रहा है । यहां पदस्थ नमूनेदार अधिकारियों के कारण जनता का कोई भी काम समय पर नहीं हो रहा। सच कहा जाए तो डॉ. चरणदास महंत के करीबी कहे जाने वाले भगवान दास गढ़ेवाल के कार्यकाल में लोगों के जुबान में एक ही बातें सुनने को मिलती है कि भगवान दास पहले से व्यावहारिक रूप से बहुत बदल गया है जबकि डा.चरणदास महंत ने दास बनकर सेवा करने को कहा था परंतु वह अब खुद को भगवान समझने लगा है। ऐसे में आगामी चुनाव में कांग्रेस को लाभ मिल पाएगा ऐसा सोचना भी बेकार है।





















