बूंद-बूंद पानी को तरस रहे बैगा पारा के निवासी

डेढ़ सौ फीट गहरी खाई में उतारकर पेयजल ले जाने को मजबूर
कोरिया/बैकुंठपुर। चिरमिरी नगरी क्षेत्र में नल जल योजना और जल जीवन मिशन जैसे कई योजनाओं से लोगों को पेयजल सुविधा दिलाने का दावा किया जा रहा है। लेकिन बैगा पारा निवासी पेयजल सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। यहां के लोग पेयजल के लिए केवल प्राकृतिक जल स्रोत तुर्रा पर ही आश्रित है। यहां से पानी ले जाना भी कोई आसान काम नहीं करीब डेढ़ सौ फिट गहरी खाई में उतरकर पानी भरने को लोग मजबूर है। यहां गहरी खाई में उतरने के बाद डब्बे के सहारे पेयजल घर ले जाते हैं। ठंडी में तो जैसे तैसे गुजारा हो जाता है लेकिन गर्मी में और बरसात में काफी परेशानी होती है। बरसात के दिनों में बारिश का पानी जल स्रोत के ऊपर तक भरने के कारण मटमैला पानी आता है तो वही गर्मी में तुरा में पानी की धार कम हो जाती है। जिससे यहां लोगों की भीड़ लगती है। स्थानीय निवासी जगमोहन का कहना है कि पास आ रही ओपन कास्ट खदान और हैवी ब्लास्टिंग के कारण पहले की तुलना में अब तुरा की धार भी कम होने लगी है। ऐसे में बस्ती के लोगों को काफी परेशानी होगी। नगर निगम क्षेत्र गोदरी पारा के आजाद नगर इलाके से लगे इस बस्ती का भी अजीब बटवारा हुआ है जानकारी के अनुसार इलाके का कुछ भाग नगर निगम के दो अलग-अलग वार्डों में आता है। और एक भाग ग्राम पंचायत भूकभूकी के वार्ड क्रमांक 7 में आता है। यहां लगभग 25 परिवार निवास करते हैं। लोग बताते हैं कि वह या तो शहरी क्षेत्र में दिहाड़ी मजदूरी कर अपना गुजारा कर रहे हैं और कुछ लोग जंगल के सहारे जी रहे हैं। बस्ती के लोगों में गले में गिल्टी और आंख से जुड़ी समस्याओं का सामने आना दिखता है। इलाके में हाल-चाल पूछने कोई नेता नहीं आता। जैसे सालों पहले जी रहे थे आज भी वैसे ही जीने को मजबूर हैं। बैगाओं की बस्ती का अजीब बटवारा बैगाओ की इस बस्ती का अजीब बटवारा हुआ है। यहां 24 से 25 घर शहरी आबादी से थोड़ी दूरी पर ही बसे हैं। लेकिन इन घरों के लिए भी इस बस्ती में नगर निगम चिरमिरी के दो वार्ड और ग्राम पंचायत भूकभुकी का एक वार्ड आता है। अगल-बगल घर होने के बावजूद भी यहां कोई पार्षद से गुहार लगा रहा है तो कोई ग्राम पंचायत के सरपंच से। बस्ती में आने के बाद तो ऐसा लगता है जैसे यहां समय 50-60 साल पीछे चला गया हो। परेशानी और दुख के सहारे यहां के लोग अपना जीवन काटने को मजबूर है।

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