बोराई नदी से धड़ल्ले से रेत का अवैध उत्खनन

सक्ती । रेत माफिया नदी से बेखौफ होकर अवैध तरीके से रेत उत्खनन और परिवहन कर रहे हैं। लेकिन खनिज विभाग सिर्फ मूक दर्शक बने बैठा हुआ है। शहर से महज कुछ ही दूर मोहंदी डिक्सी के पास बोराई नदी को बर्बाद करने का बीड़ा रेत माफियाओं ने उठा लिया है। रोज सैकड़ों टैक्टर रेत का अवैध उत्खनन कर ये माफिया नदी के अस्तित्व को मिटा रहे हैं और जिले का खनिज विभाग सिर्फ देख रहा है। कार्रवाई और वाहवाही के बटोरने के लिए महीने दो महीने में दो तीन ट्रैक्टर पकड़ अपने मुंह मिया मिठु बनते हैं और बाकी दिनों अवैध परिवहन और उत्खनन पर आंखे मूंदकर बैठ जाते हैं। जिस तरह से नदी नालों के रेत का दोहन लगातार हो रहा है उससे कहीं ना कहीं अब क्षेत्र के जल स्तर पर भी सीधा प्रभाव ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ रेत माफियाओं के कारण ही बोराई नदी में बने स्टॉप डेम को खोल दिया जाता है जिससे पूरा पानी निकल जाता है और यही कारण है कि आसपास के गांव में लगातार जल संकट गहराता जा रहा है। वहीं रेत के अवैध उत्खनन से भी नवी की सतह में पानी नहीं रह पाता है, जबकि गत कुछ वर्ष पहले तक गर्मियों के मौसम में नदी में पानी कम होने की स्थिति में रेत के बीचों बीच कुंआ रूपी गड्ढा किया जाता था जिसमें भरपूर पानी मिलता था और आसपास के लोग इसी नदी के पानी से निस्तारी भी पूरी करते थे, लेकिन जिस तरह से गत कुछ वर्षों से नदी के रेत का दोहन प्रारंभ हुआ है तो अब पानी भी नहीं रहता और सतह सूखने के कारण आसपास का जल स्तर भी काफी प्रभावित हो गया है। पड़ रहा है। जिस तरह से अवैध रेत उत्खनन हो रहा है उससे लगातार जल स्तर कम हो रहा है जिसके कारण गर्मियों में पानी की समस्या भी बढ़ रही है। भले ही अवैध उत्खनन पर खनिज विभाग चुप बैठा हो, लेकिन जिस तरह से जल संकट बढ़ रहा है उस पर भी कोई ध्यान नहीं दे रहा है। वहीं जल स्तर को बरकरार रखने बोराई नदी में कई जगहों पर स्टॉप डेम बनाया गया था लेकिन जैसे ही बारिश चालू होती है। स्टॉप डेम का गेट बंद किया जाता है और बारिश खत्म होते ही रेत का अवैध उत्खनन करने के लिए गेट को खोल दिया जाता है जिसके कारण ही जलस्तर लगातार कम हो रहा है।। ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन पर भी आरोप लगाते हुए कहा कि आए दिन रेत माफियाओं द्वारा सैकड़ों ट्रैक्टर रेत का उत्खनन करते हैं और तेज रफ्तार चलाते हुए ज्यादा से ज्यादा ट्रिप के चक्कर में दुर्घटनाओं को भी अंजाम देते हैं। मना करने की स्थिति में डराते धमकाते हैं। ग्रामीणों ने आगे कहा कि जब पुलिस और प्रशासन ही इन पर अंकुश नहीं लगा पा रहा है तो हमारी क्या बखत जो इन रेत माफियाओं के सामना कर सकें।

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