
जांजगीर। बिर्रा के सरकारी नवीन कॉलेज को छह साल बाद भी खुद का भवन नहीं िमल पाया है। यहां कॉलेज खोलने के लिए जितनी जल्दबाजी की गई, उतनी सुविधाएं बढ़ाने में लेटलतीफी की जा रही है। कॉलेज के तीन संकायों के 350 छात्र-छात्राओं की क्लास अब भी स्कूल के चार अतिरिक्त कमरों में लगाई जा रही है। नतीजा इस सत्र में कॉलेज की 60 फीसदी सीटें अब भी खाली रह गई हैं।
शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए सरकारें कितनी गंभीर हैं, यह नए खुले कॉलेजों को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है। छह साल पहले बिर्रा सरकारी नवीन कॉलेज की शुरुआत हुई, लेकिन आज तक कॉलेज को अपना भवन नहीं मिल पाया है। इसके कारण कॉलेज के छात्र-छात्राओं की क्लास स्कूल के चार कमरों में लगाई जा रही है। भवन नहीं होने के कारण कॉलेज में प्रवेश लेने वाले फस्र्ट, सेकेंड और थर्ड ईयर के छात्र-छात्राओं को परेशानी हो रही है।
छात्र-छात्राएं चार कमरे में ही पढऩे को मजबूर हैं। दरअसल 2017-2018 में भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान बिर्रा में नवीन कॉलेज खोलने की घोषणा हुई थी। उसके बाद यहां जैसे-तैस कर कॉलेज की स्थापना कर दी गई। कॉलेज में शैक्षणिक स्टाफ की नियुक्ति कर कॉलेज में 2018 से एडमिशन शुरू किया गया। 2018 के बाद प्रदेश में कांग्रेस की सरकार आई। सरकार ने कई अन्य जगहों पर कॉलेज खोलने सहित अतिरिक्त कक्ष बनवाने की घोषणा तो की पर बिर्रा कॉलेज भवन बनाने पर ध्यान नहीं दिया गया। भवन नहीं होने के कारण छात्र-छात्राएं कॉलेज में एडमिशन लेने रुचि नहीं ले रहे हैं।
साल 2019 में ही पंचायत ने कॉलेज के लिए दी थी जमीन साल 2019 में गांव में बिर्रा नवीन कॉलेज के लिए जमीन ही उपलब्ध करवा दी गई। इसके लिए टेंडर नहीं होने से 6 साल बाद भी बिर्रा शासकीय नवीन कॉलेज का भवन तैयार नहीं हो पाया है। इसका खामियाजा क्षेत्र के स्टूडेंट्स खासकर छात्राओं को भुगतना पड़ रहा है।
भवन नहीं होने से छात्रों को होती है परेशानी ट्टकॉलेज भवन बनाने के लिए जमीन चिह्नांकित कर ली गई है। भवन निर्माण के लिए प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई है। भवन नहीं होने से छात्र-छात्राओं को परेशानी होती है। छह साल से स्कूल के अतिरिक्त कक्ष में क्लास लगाई जा रही है।
– डॉ. मुकेश कुमार, प्रभारी प्राचार्य, बिर्रा नवीन कॉलेज
भवन बनाने के लिए फंड को मं?जूरी मिली पर काम नहीं हुआ कॉलेज बिल्डिंग बनाने की योजना को 2018 में नाबार्ड में शामिल कर दिया गया था। उसके बाद करीब 4 करोड़ 62 लाख रुपए उच्च शिक्षा विभाग से प्रशासकीय स्वीकृति दी गई। इसके लिए फंड नहीं आया। इससे टेंडर की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई।
प्रैक्टिकल क्लास और खेल का अभ्यास भी प्रभावित क्षेत्र के हिसाब से कॉलेज में सीट हैं, लेकिन कॉलेज में संसाधन उपलब्ध नहीं है। खुद का भवन न होने, शिफ्ट में क्लास लगने, परीक्षा आने के समय जुगाड़ पर प्रैक्टिकल क्लास लगाना, स्पोट्र्स व आर्ट एक्टिविटी सहित अन्य काम के लिए छात्र पिछले छह साल से जूझ रहे हैं।












