
नईदिल्ली, २९ अगस्त । बांग्लादेश के एक नागरिक ने 20 हजार रुपये देकर अपने एजेंट के माध्यम से न सिर्फ आधार बना लिया, बल्कि उसने पासपोर्ट भी बना लिए। भारतीय पहचान पर उसने कई बार विदेश यात्रा तक कर डाली। बड़ी चालाकी से वह बांग्लादेश व भारतीय पासपोर्ट का उपयोग लंबे समय तक करता रहा, लेकिन उसकी यह करतूत न तो बांग्लादेश और न ही भारतीय एजेंसियों के पकड़ में आई। लेकिन बांग्लादेश व भारत दोनों से ही हजारों किलोमीटर दूर दक्षिण कोरिया में उसकी चालाकी पकड़ में आई और उसे डिपोर्ट कर भारत भेज दिया गया।अब इमिग्रेशन की शिकायत पर आईजीआई थाना पुलिस ने आरोपित के खिलाफ कई घाराओं में प्राथमिकी की है। आरोपित का नाम अनुपम बरुआ है। उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। छानबीन जारी है। नागपुर के पते पर भारतीय पासपोर्ट अनुपम के भारतीय पासपोर्ट पर इसका पता नागपुर दर्शाया गया है।पासपोर्ट पर इसने अपना सरनेम बदलकर बरुआ से चौधरी कर लिया है। यह मूल रूप से बांग्लादेश के चिटगांग जिले का रहने वाला है। पूछताछ में एजेंसियों को पता चला कि वर्ष 2015 में हरिदासपुर बार्डर पार कर यह बांग्लादेश से बंगाल में दाखिल हुआ। कोलकाता में एक दिन ठहरने के बाद यह बिहार के बोधगया पहुंचा। यहां एक बौद्ध मठ में यह दो दिनों तक रहा।इसके बाद यह जय कुमार नामक एजेंट के संपर्क में आया। यह नागपुर चला गया। नागपुर में जय कुमार की मदद से इसने आधार, पैन कार्ड बनवा लिया। बाद में इसने पासपोर्ट भी बना लिया। इन सभी काम के बदले इसने जय कुमार को 20 हजार रुपये दिए। कागजात बनाने के बाद यह बांग्लादेश चला गया। आना जाना लगा रहा आरोपित ने पुलिस को बताया कि पासपोर्ट बनने के बाद वह बांग्लादेश चला गया।अगले वर्ष वह बांग्लादेश के पासपोर्ट पर भारत में दाखिल हुआ। लेकिन भारत से आगे की यात्रा के लिए यह भारतीय पासपोर्ट का इस्तेमाल किया करता था। विदेश से लौटने के बाद भारत में कुछ दिनों रुकता और फिर बांग्लादेश के पासपोर्ट का इस्तेमाल कर अपने देश चला जाता।विदेश यात्राओं के क्रम में इस बार नौकरी करने यह दक्षिण कोरिया पहुंच गया। दक्षिण कोरिया में काम करने के दौरान ही वहां की स्थानीय एजेंसी ने जब इससे वहां ठहरने के कागजात मांगे तो यह हड़बड़ा गया। पता चला कि यह समय अवधि बीत जाने के बाद भी वहां रुका हुआ था।इसके बाद पूछताछ में इसने वहां सारी बता बयां कर दी। आरोपित ने दक्षिण कोरिया की यात्रा भारतीय पासपोर्ट पर कर की थी, इसलिए उसे वहां से बांग्लादेश न भेजकर भारत डिपोर्ट किया गया। एजेंट की तलाश पुलिस इस मामले में उस जय कुमार की तलाश में जुटी है, जिसने इसे फर्जी तरीके से नागपुर में आधार व अन्य दस्तावेज दिए। इसके अलावा यह भी पता किया जा रहा है कि यह भारत कुल कितने बार आ चुका है। नालागढ़ में भूस्खलन से बनी 15 मीटर गहरी झील खतरे में समाया शहर, छ्वष्टक्च से भी नहीं हुआ समाधान शिमला/नालागढ़। सोलन जिले के औद्योगिक क्षेत्र नालागढ़ में भूस्खलन से सैरी खड्ड का बहाव रुकने से झील बन गई है। अभी इसका आकार छोटा है, लेकिन स्थिति ऐसी ही रही तो बड़ी झील बनने से नालागढ़ शहर को खतरा हो सकता है। सोमवार को लोक निर्माण विभाग के कर्मचारियों ने पानी की निकासी का प्रयास किया, लेकिन जेसीबी खड्डे तक नहीं पहुंच पाई।शुक्रवार को नालागढ़-रामशहर मार्ग पर भूस्खलन होने से मलबा सैरी खड्डे में जा गिरा था। अब यहां पांच मीटर लंबी व करीब 15 मीटर गहरी झील बन गई है। यदि एकदम पानी छूटा तो नालागढ़ शहर में नुकसान हो सकता है।लोक निर्माण विभाग के अधीशाषी अभियंता प्रबर सिंह का कहना है कि पानी की निकासी का प्रयास किया जा रहा है। खड्डे का जलस्तर कम होते ही कर्मचारियों को काम पर लगा दिया जाएगा।वहीं, प्रदेश में सोमवार को दिन की शुरुआत खिली धूप से होने के बाद करीब 11 बजे कई स्थानों पर हल्की वर्षा हुई। बिलासपुर के बरठीं में छह, शिमला व ऊना में पांच-पांच मिलीमीटर और डलहौजी में चार मिलीमीटर वर्षा हुई। अब प्रदेश में रात को ठंड महसूस होने लगी है।प्रदेश में अभी तीन एनएच सहित 348 सड़कें यातायात के लिए बंद हैं। इन्हें खोलने के प्रयास किए जा रहे हैं। मंडी जोन में 155, शिमला में 86, कांगड़ा में 55, हमीरपुर जोन में 49 सड़कें बंद हैं। प्रदेश में अब तक 8642.83 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है।













