
न्यूयॉर्क, १३ अगस्त । भारतीय मूल के 41 वर्षीय व्यक्ति को फर्जी पहचान दस्तावेज रखने का दोषी करार देते हुए लगभग चार साल के कारावास की सजा सुनाई गई।बता दें कि दोषी बिना लाइसेंस के धन हस्तांतरण व्यवसाय का संचालन कर रहा था जिसके कारण पीडि़तों को 15 लाख अमेरिकी डॉलर का नुकसान हुआ था। कल जारी एक बयान में कहा गया कि इंडियाना के प्लेनफील्ड के निवासी विमलकुमार त्रिवेदी को संघीय जेल में 46 महीने कैद की सजा सुनाई गई है।अमेरिकी जिला अदालत की मुख्य न्यायाधीश तान्या वाल्टन प्रैट ने सजा सुनाई और संघीय जेल से रिहाई के बाद तीन साल तक अमेरिकी परिवीक्षा कार्यालय द्वारा त्रिवेदी की निगरानी किए जाने का आदेश दिया। अधिकारियों ने कहा कि त्रिवेदी एक धोखाधड़ी का हिस्सा था, जिसमें निर्दोष पीडि़तों की मेहनत की कमाई को ठगने के लिए डराने वाली रणनीति अपनाई और फर्जी पहचान का इस्तेमाल किया गया। अदालत के दस्तावेजों के अनुसार, अप्रैल 2017 से अप्रैल 2021 तक त्रिवेदी ने कूरियर सेवाओं के माध्यम से इंडियानापोलिस सहित विभिन्न स्थानों पर नकदी भेजने के लिए कुछ बुजुर्गों सहित कई पीडि़तों के साथ धोखाधड़ी की।प्राप्त जानकारी के मुताबिक, त्रिवेदी ने पीडि़तों से चुराए गए 60,000 अमेरिकी डॉलर अपने इस्तेमाल के लिए रख लिए और बाकी रकम अपने सहयोगियों को भेज दी।


















