भारत ने दिखाया बड़ा दिल, जैसलमेर में 927 पाक विस्थापितों को दी गई भारतीय नागरिकता

जोधपुर, १६ फरवरी ।
सीएए कानून के तहत भारत में पाकिस्तान से 2014 से पहले धार्मिक उत्पीडऩ के कारण आए हिंदू , सिख , बौद्ध , जैन , पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान के तहत जैसलमेर में पहली बार 927 पाकिस्तानी विस्थापितों को भारतीय नागरिकता प्रदान की गई । इस मौके पर विस्थापितों ने खुशी जाहिर करते हुए केंद्र सरकार को धन्यवाद किया। उन्होंने बताया कि यह कदम उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा है , क्योंकि भारतीय नागरिकता मिलने से उन्हें न केवल कानूनी सुरक्षा मिली है , बल्कि उनके बच्चों को भी भविष्य में शिक्षा और रोजगार के मौके मिलेंगे। नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) लागू होने के बाद जैसलमेर के कलेक्ट्रेट स्थित डीआरडीओ भवन में आयोजित कार्यकम में जिला प्रशासन और जनगणना विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति रही। इस मौके पर पाकिस्तान से आए हिंदू विस्थापितों को नागरिकता प्रमाण पत्र दिए गए। विस्थापितों ने खुशी जाहिर करते हुए केंद्र सरकार को धन्यवाद किया। इस कानून के लागू होने से पाकिस्तान से आए हिंदू विस्थापितों के लिए नागरिकता प्राप्त करना आसान हो गया है। पहले इन विस्थापितों को भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के लिए कई औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती थीं , जिनमें 12 वर्षों तक भारत में निवास का शर्त भी शामिल थी । अब सीएए के तहत इस प्रक्रिया को सरल किया गया है और ऑनलाइन आवेदन करने की व्यवस्था से यह अधिक सुगम हो गई है । सीएए लागू होने के बाद जैसलमेर में यह पहला अवसर है , जब इतनी बड़ी संख्या में विस्थापित हिंदुओं को नागरिकता दी गई । इस कार्यक्रम में शामिल हुए विस्थापितों ने खुशी जाहिर करते हुए केंद्र सरकार को धन्यवाद किया। उन्होंने बताया कि यह कदम उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा है।पाक विस्थापितों के लिए काम करने वाले सीमांत लोक संगठन के हिन्दू सिंह सोढ़ा ने कहा कि पाकिस्तान से आए लोग अब भारत में सुरक्षित हैं और उनकी सामाजिक और कानूनी स्थिति अब एक नई दिशा में अग्रसर हो रही है। इन विस्थापितों का कहना था कि नागरिकता मिलने के बाद वे अपने जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर सकेंगे । उन्हें अब अपने परिवारों के लिए स्थिरता मिलेगी ।पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर , जैसलमेर और आसपास के क्षेत्रों में हजारों पाकिस्तानी विस्थापित हिंदू रह रहे हैं । उन्हें नागरिकता की आवश्यकता है । सीएए लागू होने के बाद इन विस्थापितों को नागरिकता प्रक्रिया में काफी सरलता महसूस हो रही है ।

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