
कोरबा। कोल इंडिया के चेयरमैन के गेवरा आगमन पर भू-विस्थापितों के घेराव करने की आशंका से ग्रसित सीएमडी ने शस्त्र बल के जवानों की छावनी तैयार की गई थी। भू-विस्थापितों की शोषण की पोल खुले न इसलिए उन्हें चेयरमैन के आसपास फटकने नहीं दिया गया।
कोल इंडिया के चेयरमैन पीएम प्रसाद व वन महानिदेशक चंद्र प्रकाश गोयल गुरूवार को एसईसीएल की गेवरा, कुसमुंडा व दीपका खदान के दौरे पर रहे। हेलीकाप्टर से सुबह 10 बजे गेवरा स्थित हेलीपेड पर अधिकारी उतरे और वहां से सीधे गेवरा हाऊस पहुंचे। यहां एसईसीएल के अधिकारियों के साथ चर्चा किए और खदानों का निरीक्षण करने रवाना हो गए। चेयरमैन व वन महानिदेशक के प्रवास को लेकर स्थानीय स्तर पर व्यापक तैयारियां की गई थी और भू-विस्थापितों के विरोध को देखते हुए काफी संख्या में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआइएसएफ) के जवानों को जगह- जगह तैनात किया गया था। ताकि कोई भी चेयरमैन व वन महानिदेशक के समीप पहुंच न सके। दरअसल नौकरी, रोजगार, मुआवजा समेत अन्य समस्या को लेकर पिछले दो साल से भू- विस्थापितों के विभिन्न संगठन आंदोलन कर रहे हैं। खदान बंदी, आर्थिक नाकेबंदी कर लगातार विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। बावजूद इसके भू-विस्थापितों की समस्या का निदान एसईसीएल प्रबंधन नहीं कर रही। भू-विस्थापित नौकरी पाने भटक रहे हैं। अकेले दीपका खदान की बात करें तो तीन गांव सुआभोड़ी, मलगांव व रेंकी के 614 भू-विस्थापितों में अब तक 384 को मुआवजा नहीं मिला है। कुसमुंडा व गेवरा की बात की जाए, तो लगभग दो हजार भू-विस्थापित अपनी समस्याओं को लेकर आक्रोशित हैं।



















