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बिलासपुर । नवनिर्वाचित महापौर के शपथ ग्रहण समारोह में उस वक्त कानाफूसी शुरू हो गई जब महापौर पूजा विधानी ने शपथ लेते वक्त एक बड़ी शाब्दिक गलती कर दी। उस गलती को सुधारने उन्हें दुबारा शपथ लेनी पड़ी।
दरअसल, शपथ लेते वक्त महापौर को कहना था कि मैं भारत की प्रभुता और अखंडता को अक्षुण्ण रखूंगी लेकिन पूजा विधानी ने शपथ लेते हुए सांप्रदायिकता को अक्षुण्ण रखूंगी बोल दिया। इस पर सब तरफ खुसुर पुसुर होने लगी। नव निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को शपथ कलेक्टर अवनीश शरण दिला रहे थे। मंच पर बैठे अतिथियों को भी शायद इस पर आश्चर्य हुआ इसलिए आनन-फानन में महापौर पूजा विधानी को दुबारा शपथ लेने के लिए कहा गया। इस पूरे मामले में यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि महापौर ने सचमुच में बोलने से गलती कर दी या उन्हें शपथ हेतु दिए गए कागज में गलत लिखा था ।
अव्यवस्था के बीच शुरू हुए शपथ समारोह में पहले तो मुख्यमंत्री के नहीं आने की घोषणा की गई,उसके बाद महापौर के शपथ में गलती, उसके बाद पार्षदों के शपथ लेने की बारी आई तो पहले क्रम के सारे 10 पार्षद एक साथ कागज में लिखे शपथ को पढ़ना शुरू कर दिए जिस पर कलेक्टर को बोलना पड़ा कि वह शुरू के शब्द मैं को पढ़ेंगे, उसके बाद सारे पार्षद अपना नाम लेते हुए शपथ पत्र को पढ़ेंगे। 10-10 पार्षदों को एक-एक बार में शपथ दिलाई गई। इस दौरान दो बार अव्यवस्था हुई । लोगों का कहना था कि जिस तरह 15 अगस्त और 26 जनवरी के एक दिन पहले रिहर्सल होता है, उसी तरह पार्षदों का भी एक दिन पहले शपथ का रिहर्सल होना था। ऐसा होता तो यह फजीहत नहीं होती । व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले निगम के अधिकारी ने कंजूसी बरतते हुए सारी व्यवस्था सिर्फ मंच पर बैठे लोगों के लिए की थी,फिर बिल चाहे जो भी बनवा लिया जाए। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के नहीं आने पर केंद्रीय मंत्री तोखन साहू ,उप मुख्यमंत्री अरुण साव ,पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ,विधायक धरम लाल कौशिक,पूर्व मंत्री व विधायक अमर अग्रवाल ,विधायक धर्मजीत सिंह,सुशांत शुक्ला की उपस्थिति में नवनिर्वाचित मेयर और 70 पार्षदों ने शपथ लिया। समारोह को फीका- फीका भी आए हुए लोग बताते रहे।