
जनकपुर। एमसीबी जिले के भरतपुर विकासखंड अंतर्गत माड़ीसरई धान खरीदी केंद्र में प्रबंधक द्वारा रखे गए दलालों का बोलबाला रहता है, जो किसान बिना दलाल के चंगुल में फंसे सीधे खरीदी केंद्र में अपनी धान बेंचने की कोशिश करता हैं, उन्हें खासी परेशानियों का सामना करना पडता है। माड़ीसरई धान खरीदी केंद्र में अपनी खून पसीने की मेहनत से तैयार धान की उपज को लेकर आने वाले कृषक राम स्वरूप पिता माधव लाल ग्राम सतक्यारी, हीरालाल पिता बदन सिंह ग्राम पूंजी, नेपाल सिंह, पिता राम खुलन ग्राम कर्री, राजू सिंह ग्राम पूंजी ने बताया कि यहाँ के किसान प्रबंधक के द्वारा लगाए गए दलालों से प्रताडि़त हो रहें हैं।
दलालों के द्वारा मांगी गई पैसा नहीं देने पर नाराज होकर टोकन के अनुसार आधा धान ही लिया जाता है। बाकी आधा धान को दुबारा सत्यापन कराने को कहकर वापस कर देते हैं। वहीं किसानों ने बताया कि माड़ीसरई धान खरीदी केंद्र में धान लेकर पहुंचने वाले क्षेत्र के छुटभैया नेताओं, बड़े किसानों एवं व्यापारियों के धान को आंखों में पट्टी बांधकर ले लिया जाता है। हम किसानों द्वारा प्रबंधक के दलालों द्वारा प्रताडि़त किए जाने एवं दलालों द्वारा धान को पास करने एवं आनलाइन इंट्री करने के बदले पैसा की मांग करने की जानकारी सहायक नोडल अधिकारी अपोल खलखो को देने पर वो भी कुछ नहीं करते हैं, क्योंकि वो सुबह से नशे में रहते हैं।
किसानों ने बताया है कि माड़ीसरई धान खरीदी केंद्र में प्रबंधक के दलालों द्वारा जब तक हमसे एक बोरा धान नहीं लेते तब तक धान के बोरी की गिनती और तौल नहीं कराते हैं। और जब तक पांच सौ रुपए से एक हजार रूपया आपरेटर व सर्वेयर को नहीं दिया जाता है, तब तक किसानों की धान कम्प्यूटर में नहीं चढ़ाई जाती व पावती पर्ची भी नहीं दी जाती है। जबकि हम किसानों से 40 किलो 700 ग्राम के स्थान पर 41 किलो 200 ग्राम यानि प्रति बोरी आधा किलो ज्यादा धान लिया जाता है, साथ ही हम किसान स्वयं और अपने मजदूरों से समिति के बोरी में धान की भराई, सिलाई, व पल्लेदारी कर छल्ली लगाते है। किसानों ने दुखी मन से बताया कि हम लोगों से बहुत बड़ी गलती हो गई जो हम अपनी धान लेकर खरीदी केंद्र में बेचने के लिए आ पहुंचे है, इससे तो अच्छा था कि स्थानीय व्यापारियों को धान बेंच देते, जहां न तो पैसा देना पड़ता और न ही पल्लेदारी करनी पड़ती। सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार रात के समय व्यापारियों की धान समिति में लाई जाती है, जिसे खरीदी केंद्र के दलालों द्वारा सुबह होते ही जमा करा दिया जाता है, जिनका न कोई नम्बर लगता है न ही उन्हें किसी का इंतजार करना पड़ता है। सुबह होते ही उनकी धान को समिति द्वारा बिना रोकटोक के जमा कर आनलाइन दर्ज कर लिया जाता है। वही क्षेत्रीय गरीब व छोटे किसानों को अपनी धान बेचने के लिए काफी मशक्कत करना पड़ रहा है, जिस वजह से क्षेत्रीय किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

















