
नईदिल्ली, १४ जून ।
यह केंद्र सरकार के स्तर पर नीतिगत और प्रशासनिक निरंतरता का एक और प्रमाण है। मंत्रियों के चयन और उनके बीच विभागों के बंटवारे में इस निरंतरता के प्रदर्शन के बाद चार अत्यंत महत्वपूर्ण नियुक्तियों में भी इस पर नए सिरे से मुहर लगाई गई है।कैबिनेट मंत्री का दर्जा रखने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के पद पर अजित डोभाल, प्रधानमंत्री के कैबिनेट सचिव के रूप में पीके मिश्र और पीएम के सलाहकार के रूप में सेवानिवृत आईएएस अफसरों अमित खरे तथा तरुण कपूर की फिर से नियुक्ति उन पर प्रधानमंत्री के भरोसे को दर्शाती है। गुरुवार को इन अफसरों की नियुक्ति संबंधी आदेश जारी किए गए।डोभाल और पीके मिश्र की नियुक्ति इस सरकार के कार्यकाल के अंत तक की गई है, जबकि अमित खरे और तरुण कपूर को दो साल का नया कार्यकाल मिला है। पीएम के सलाहकारों का दर्जा केंद्र सरकार के सचिव के बराबर होता है। डोभाल और पीके मिश्र की फिर से नियुक्ति का यह भी मतलब है कि ये दोनों सेवानिवृत अफसर पीएमओ में सबसे लंबी अवधि तक सेवा देने वाले अधिकारी बन जाएंगे।एनएसए के रूप में डोभाल राष्ट्रीय सुरक्षा, सेना से संबंधित मामलों और खुफिया तंत्र से जुड़े विषयों की कमान संभालेंगे, जबकि पीके मिश्र पीएमओ में नियुक्ति के साथ ही प्रशासनिक मामलों की कमान संभालेंगे। 1968 बैच के आईपीएस अफसर डोभाल उन बिरले विशेषज्ञों में शामिल हैं, जिनके पास सामरिक चिंतन और अभियानों के संचालन की योजना बनाने की एक साथ क्षमता मौजूद है। वह आतंकवाद रोधी रणनीतियों के लिए तो विख्यात हैं ही, नाभिकीय मसलों के भी विशेषज्ञ माने जाते हैं।पीके मिश्र 1972 बैच के रिटायर्ड अफसर हैं। कृषि मंत्रालय में सचिव के पद से सेवानिवृत होने वाले मिश्र पिछले एक दशक से प्रधानमंत्री मोदी से जुड़े हैं। इन दोनों पर ही पीएम मोदी को अटूट भरोसा रहा है। सरकार के ढांचे में अत्यंत शक्तिशाली और अपने-अपने क्षेत्रों के विशेषज्ञ होने के बावजूद दोनों रिटायर्ड अफसर खामोशी से अपना काम करने के लिए जाने जाते हैं।डोभाल पड़ोसी देशों के साथ मजबूत वार्ताकार के रूप में भी उभरे हैं। 2017 में डोकलाम में चीनी आक्रामकता का मुंहतोड़ जवाब देने में भी डोभाल की प्रमुख भूमिका थी।
चीन के साथ सीमा विवाद हल करने के लिए बातचीत की प्रक्रिया में वह देश के विशेष प्रतिनिधि भी हैं।