यमुना में झाग रोकने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट की जरूरत, त्वचा पर खुजली और संक्रमण का खतरा

नईदिल्ली, 0७ फरवरी । संसद की एक स्थायी समिति ने कहा है कि यमुना में झाग बनने से रोकने के लिए दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से इस नदी में प्रवाहित किए जाने वाले समूचे सीवेज का ट्रीटमेंट करने की जरूरत है। यमुना में झाग का बड़ा कारण बिना ट्रीटमेंट वाले सीवेज में फॉस्फेट और सर्फेक्टेंट्स की मौजूदगी है। समिति का कहना है कि प्रदूषित नदी में झाग से त्वचा पर खुजली और संक्रमण हो सकता है। जल संसाधनों पर स्थायी समिति ने अपनी 27वीं रिपोर्ट में रेखांकित किया है कि यमुना में झाग को दिल्ली में आईटी ब्रिज, ओखला व कालंदी कुंज जैसे स्थानों पर देखा गया है।ओखला बैराज से नीचे की तरफ झाग ज्यादातर पानी के नीचे गिरने की वजह से बनता है। इस बैराज का रखरखाव उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग द्वारा किया जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, ओखला बैराज पर दिल्ली का पूरा पानी (ट्रीटमेंट वाला और बिना ट्रीटमेंट वाला) अवरुद्ध कर दिया जाता है और सिर्फ अतिरिक्त पानी ही नीचे छोड़ा जाता है।समिति ने रिपोर्ट में अपनी पहले की सिफारिशें दोहराई हैं कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों (एसटीपी) की तकनीक को उन्नत बनाकर उनकी क्षमता को बढ़ाया जाए और सभी उद्योगों को साझा अपशिष्ट उपचार संयंत्रों से जोड़ा जाए। साथ ही कहा कि बैराज के गेटों को इस तरह खोला और बंद किया जाना चाहिए कि डिस्चार्ज के मुक्त प्रवाह को रोका जा सके। यमुना से लगते बाढ़ वाले क्षेत्रों या वेटलैंड पर अतिक्रमण के मुद्दे पर समिति ने कहा कि सिर्फ दिल्ली और हरियाणा ने ही आवश्यक जानकारी मुहैया कराई है। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे यमुना बेसिन के राज्यों को भी आवश्यक जानकारी उपलब्ध करानी चाहिए। समिति ने अतिक्रमण हटाने के लिए उठाए गए कदमों के बारे भी तीन महीने के भीतर जानकारी देने को कहा है। समिति ने कहा है कि हथिनीकुंड बैराज पर उपलब्ध यमुना के पानी का पूरा इस्तेमाल कर लिया जाता है इसलिए वजीराबाद के नीचे गैर-मानसूनी मौसम में नदी में पानी का प्रवाह न के बराबर होता है। गैर-मानसूनी मौसम में नदी के सूखने का एक कारण बोरवेल के जरिये भूजल का दोहन भी है।कृषि क्षेत्र में पानी की खपत को कम करने और यमुना को प्रदूषण से बचाने के लिए समिति ने नदी क्षेत्रों में माइक्रो व ड्रिप सिंचाई, जैविक खेती और वाटर हार्वेस्टिंग की सिफारिश की है। समिति ने रिपोर्ट में अवैध रेत खनन को रोकने पर भी जोर दिया है।समित ने जल संसाधन विभाग से ऐसे दिशानिर्देश या नियम तैयार करने सिफारिश की है जिसमें यमुना सहित सभी नदियों में अपशिष्ट प्रवाहित करने के विरुद्ध दंडात्मक प्रविधान शामिल हों। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के तहत यमुना को तीन हिस्सों में वर्गीकृत किया गया है। यमुनोत्री से हथिनीकुंड बैराज तक के हिस्से को बिना प्रदूषण वाला हिस्सा माना जा सकता है। हथिनीकुंड बैराज से पल्ला तक का हिस्सा मध्यम प्रदूषित है जबकि पल्ला से ओखला तक, बुनियादी रूप से दिल्ली का हिस्सा बेहद प्रदूषित है। रिपोर्ट के मुताबिक, समिति ने विभाग की दलील से पाया कि यमुना का दिल्ली वाला हिस्सा (40 किलोमीटर) नहाने योग्य नहीं है। समिति ने जल संसाधन विभाग को सुझाव दिया है कि वह यमुना नदी के लिए भी स्वच्छ गंगा कोष की तर्ज पर कोष स्थापित करने की संभावना तलाशे ताकि नदी को साफ करने से जुड़े कामों में पैसे की कमी से बाधा नहीं आए। समिति ने नमामि गंगे कार्यक्रम की सराहना भी की। संसद की एक प्राक्कलन समिति ने अपनी 2018 की सिफारिशों पर एक्शन टेकन नोट्स दाखिल करने में पर्यावरण मंत्रालय की ओर से अभूतपूर्व देरी पर नाखुशी व्यक्त की है। इस प्राक्कलन समिति ने मंगलवार को अपनी ताजा रिपोर्ट लोकसभा में प्रस्तुत की।

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