
आरबीआई के नियमों को नहीं मानते बैंक मैनेजर
कोरबा। वित्तीय लेनदेन के मामले में नागरिक कुल मिलाकर भारत सरकार के द्वारा अधिकृत बैंकिंग संस्थानों पर निर्भर हैं जहां से उन्हें कई प्रकार की सुविधा प्राप्त हो रही हैं। इन सब के बीच कोरबा में यूनियन बैंक के द्वारा अपने उपभोक्ताओं से 10 और ?20 के मूल्य वाले पुराने नोट नहीं लिए जा रहे हैं। स्पष्ट कारण नहीं बताने से उपभोक्ता परेशान है और उन्होंने इस पर नाराजगी जाहिर की है।
किसी भी स्तर पर इस प्रकार की जानकारी सामने नहीं आई है और ना ही इसे सार्वजनिक किया गया है जिसके कारण इस तरह की व्यवस्था पर यूनियन बैंक काम कर रहा है।

हाल में ही उसने अपनी स्थानीय शाखों में रुपए 10 और 20 के पुराने नोट को लेने से साफ तौर पर मना कर दिया कई लोग अपनी जमा राशि में पुराने नोट लेकर पहुंचे तो उन्हें चला कर दिया गया लोगों के द्वारा पूछताछ की गई तो उन्हें ठोस कारण नहीं बताया गया। लोगों ने बैंक प्रबंधन के इस रवैया पर हैरानी जताई कि आखिर कौन से नियम के तहत यह सब किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि पुराने नोट नहीं लेने को लेकर ना तो उन्होंने ऐसा कोई सरकारी सर्कुलर अब तक देखा है और ना ही बैंक प्रबंधन के द्वारा अपनी शाखों में इसके संदर्भ से जानकारी सार्वजनिक की गई है । ऐसे में बैंक प्रबंधन के दावे पर विश्वास करना मुश्किल है।
चेस्ट ब्रांच को होती है जानकारी
कोरबा के एक वरिष्ठ बैंक अधिकारी ने तरुण छत्तीसगढ़ को इस बारे में बताया कि रूपों के प्रचलन और उनसे जुड़े मामलों के बारे में आरबीआई से संबंधित जानकारी केवल चेस्ट ब्रांच को ही होती है और इसके अलावा किसी को नहीं । वर्तमान में कोरबा जिले में स्टेट बैंक और पीएनबी ही चेस्ट ब्रांच के रूप में रिकॉग्नाइज है और सर्कुलर इनके पास आते हैं और फिर यहां से आगे इसे सर्कुलेट किया जाता है । मौजूदा बदलाव के बारे में फिलहाल हमें कोई जानकारी नहीं है।
हर चीज नहीं दे सकते लिखकर BM
यूनियन बैंक किन कारणों से पुराने नोट नहीं ले रहा है, इस बारे में प्रबंधन न तो लोगों को संतुष्ट कर रहा है और न ही उनकी समस्या का समाधान कर रहा है। इस प्रकार के मामलों में जब लोग पूछताछ करते हैं तो उन्हें यही कहा जाता है कि सब चीज लिखित में नहीं दी जा सकती। बैंक मैनेजर हेमंत साहू का जवाब प्रकरणों में ऐसा ही है। नोटों के कटे-फटे होने को लेकर उनके पास जवाब नहीं है और न ही इसका जवाब है कि जब दूसरे बैंक इस प्रकार के नोट ले रहे हैं तो आखिर यहां पर समस्या क्यों पैदा की जा रही है।














