
अंबिकापुर। मानसून द्रोणिका के प्रभाव से सरगुजा संभाग में लगातार तीन दिनों तक हुई वर्षा ने खरीफ फसल की तैयारियों को गति दे दी है। कम वर्षा के कारण बड़े इलाके में जहां धान की नर्सरी नहीं लगी थी वहां अब किसान नर्सरी लगाने में जुट गए हैं। सिंचित क्षेत्रों में तैयार नर्सरी की रोपाई के लिए खेतों को तैयार किया जा रहा है। मानसून की दोबारा सक्रियता से जुलाई के पहले पखवाड़े के अंतिम दिनों में उत्तरी छत्तीसगढ़ के अधिकांश इलाकों में वर्षा दर्ज की गई है।
पिछले चौबीस घंटे की वर्षा पर नजर डालें तो सबसे ज्यादा बारिश बलरामपुर जिले के कुसमी में 235 मिमी हुई है। यह इलाका झारखंड से सटा होने के कारण यहां द्रोणिका ज्यादा प्रभावी रहा। इस कारण यहां मूसलाधार बारिश हुई। एक सप्ताह पहले की तुलना में सरगुजा संभाग के कम वर्षा वाले क्षेत्रों की हालत कुछ सुधरी है। प्रदेश में सबसे न्यूनतम वर्षा वाले सरगुजा जिले में अब औसत वर्षा की कमी 67 प्रतिशत से घटकर 58 प्रतिशत पहुंच गई है, यानी तीन दिनों में औसम वर्षा की स्थिति में लगभग दस प्रतिशत का सुधार हुआ है।जून माह के बाद जुलाई में अल्प वर्षा की स्थिति सुधरने के बाद अब धान की खेती में तेजी आ गई है। खेतों में पर्याप्त नमी आ गई है। इससे किसान धान की खेती में जुट गए हैं। रोपाई के अलावा अन्य पद्धति से बोवाई शुरू हो गई है।
मौसम विज्ञानी एएम भट्ट के अनुसार मानसून द्रोणिका अभी भी उत्तर क्षेत्र में प्रभावी है। यह वर्तमान में डाल्टेनगंज से खिसककर डिहरी, आसनसोल की ओर है। इधर झारखंड के ऊपर एक चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है। इन सब कारणों से अगले दो तीन दिनों तक उत्तरी छत्तीसगढ़ में बारिश की संभावना बनी रहेगी।





























