रेस्क्यू के लिए सुरंग का ये 22 से 40 मीटर का हिस्सा बचा सकता है जान, विशेषज्ञों को दिखी आस

उत्तरकाशी, २२ नवंबर। सिलक्यारा की सुरंग में फंसे श्रमिकों को बाहर निकालने के लिए विशेषज्ञ इस समय छह योजनाओं पर कार्य कर रहे हैं। इस समय फोकस क्षैतिज ड्रिलिंग, यानी मौजूदा सुरंग के मुख्य हिस्से से ही भीतर ड्रिलिंग करने पर है। यहीं से लाइफलाइन पाइप को फंसे श्रमिकों तक पहुंचाया गया है। इस सुरंग में पूर्व में डाले गए पाइप के भीतर से ही नए पाइप डाले जा रहे हैं। अब चुनौती मलबे के 22 मीटर से लेकर 40 मीटर तक के हिस्से में ड्रिल कर पाइप को पार करने की है। बचाव कार्य में लगी एजेंसियों को यदि इसमें सफलता मिलती है तो फिर यहीं से श्रमिकों को बाहर निकाला जा सकता है। सिलक्यारा में सुरंग में फंसे श्रमिकों को निकालने के लिए इस समय कई योजनाओं पर काम चल रहा है, लेकिन कार्य अभी सिलक्यारा के मुख्य द्वार के भीतर सुरंग और बड़कोट में निकलने वाले दूसरे छोर पर ही शुरू हुआ है। इसमें भी इस समय विशेषज्ञ सिलक्यारा से बनी सुरंग के भीतर ही मलबे में ड्रिलिंग पर ही विशेष ध्यान केंद्रित किए हुए हैं। एनएचआइडीसीएल के प्रबंध निदेशक महमूद अहमद का कहना है कि शुरुआती चरण में पाइप डालने में कोई परेशानी नहीं है, लेकिन चुनौती इसके बाद के हिस्से में है। यहां पर ठोस पत्थर गिरे हो सकते हैं। इसी 22 मीटर पर पहली ड्रिलिंग रोकी गई थी। अब छोटे पाइप डाले जा रहे हैं। यदि इस हिस्से में सफलतापूर्वक ड्रिलिंग हो जाती है तो फिर कार्य आसान हो जाएगा। इंटरनेशनल टनलिंग एंड अंडरग्राउंड स्पेस एसोसिएशन के अध्यक्ष अर्नाल्ड डिक्स का भी यही मानना है। उनका कहना है कि इस समय क्षैतिज ड्रिलिंग पारंपरिक तरीके से किया जाना उचित है। यद्यपि हमने सभी विकल्प खुले रखे हैं। उनका कहना है कि प्राथमिकता सभी श्रमिकों को सुरक्षित तरीके से बाहर निकालने की है। यही कारण भी है कि अभी वर्टिकल ड्रिलिंग का कार्य शुरू नहीं हो पाया है।

RO No. 13467/11