लखन की तरह लोकसभा के लिए ज्योतिनंद हो सकते हैं भाजपा का मास्टर स्ट्रोक


वर्ष 2019 के चुनाव में दी थी कांग्रेस को कड़ी टक्कर

कोरबा। माथे पर लगे हार के कलंक को दरकिनार कर दिया जाए तो कोरबा लोकसभा के लिए शहर विधायक एवं प्रदेश के केबिनेट मंत्री लखनलाल देवांगन की तरह छत्तीसगढ़ आयोग के पूर्व अध्यक्ष ज्योतिनंद दुबे मास्टर स्ट्रोक साबित हो सकते हैं।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक लोकसभा चुनाव में यदि किसी प्रत्याशी या शख्स की हार 30 हजार से कम वोटों से तथा विधानसभा में 5000 से कम मतों के अंतर से होती है तो इसे बड़ा हार नहीं माना जाता और संबंधित व्यक्ति को दोबारा मौका दिया जाए तो वह इसे पूर्व की चूक को सुधारकर कव्हर कर सकता है तथा उसके विजय होने की संभावना प्रबल रहती है बनिस्पद नए प्रत्याशी के। भाजपा के पूर्व प्रत्याशी ज्योतिनंद दुबे की हार भी गत लोकसभा चुनाव में लगभग 26 हजार मतों के अंतर से हुई थी। इस चुनाव में कांग्रेस ने पार्टी के कद्दावर नेता तथा तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत की पत्नी श्रीमती ज्योत्सना महंत को मैदान में उतारा था। विधानसभा अध्यक्ष की पत्नी के कोरबा लोकसभा चुनाव में मैदान में होने की वजह से यह सीट हाई प्रोफाइल हो गई थी। कांग्रेस हर बड़े नेताओं की नजर यहां पर लगी हुई थी और सीट को हासिल करने के लिए हर जोर आजमाइश को तैयार थे। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी हुई थी। उन्होंने भी पूरी ताकत झोंक दी थी। जबकि एकाएक प्रत्याशी बनाए जाने से भाजपा प्रत्याश ज्योतिनंद दुबे की ओर से विशेष तैयारी नहीं हो पाई थी बावजूद इसके इस हाई प्रोफाइल सीट पर उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी को जोरदार टक्कर दी थी तथा कोरबा विधानसभा के साथ-साथ बिलासपुर जिले तथा वर्तमान में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही व कोरिया के बैकुंठपुर, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी व भरतपुर-सोनहत विधानसभा क्षेत्र में बड़ी बढ़त लेने के बाद कोरबा जिले के आदिवासी बाहुल्य रामपुर, पाली-तानाखार व कटघोरा में पिछडऩे के बाद हार हो गई थी और कांग्रेस प्रत्याशी ज्योत्सना महंत लगभग 26 हजार वोटों से चुनाव जीत सांसद बन गईं। हार के बावजूद ज्योतिनंद दुबे की पकड़ कोरबा लोकसभा में बरकरार है। यदि हार के इस कलंक को दरकिनार कर भाजपा उन्हें दोबारा मौका देती है तो अबकी बार 400 के पार पार्टी तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपनों को साकार करने में एक कड़ी साबित हो सकती है। यहां यह बताना जरूरी है कि हाल में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी ने कटघोरा विधानसभा क्षेत्र में वर्ष 2018 के चुनाव में हारने के बावजूद लखनलाल देवांगन को कोरबा विधानसभा क्षेत्र से टिकट देकर कांग्रेस के कद्दावर नेता तथा मंत्री जयसिंह अग्रवाल के विरूद्ध चुनाव मैदान में उतारा था। इस चुनाव में श्री देवांगन ने अपनी सटीक रणनीति के बलबूते असंभव से समझे जाने वाले सीट को लगभग 26 हजार मतों के अंतर से आसानी से जीत लिया। बदले में पार्टी ने उन्हें केबिनेट मंत्री बनाकर इस जीत का ईनाम दिया है और वाणिज्य, उद्योग एवं श्रम मंत्रालय का प्रभार भी सौंपा है।

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