
कोरबा । जिले में लगातार कोशिश के बाद भी साऊथ ईस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड (स्श्वष्टरु) के उच्च अधिकारी खुले मुहाने की कोयला खदानों में बारिश से उत्पादन पर असर पड़ा है। मेगा प्रोजेक्ट गेवरा, कुसमुंडा और दीपका पर पड़ा है। लगातार हो रही बारिश ने एसईसीएल के उच्च अधीकारियों को भी चिंता में डाल दिया है। कंपनी के उच्च अधिकारी इस कोशिश में लगे हुए हैं कि कोयले का उत्पादन अनवरत होता रहे।
एक सप्ताह पहले तक कंपनी में करीब 6 लाख टन से अधिक कोयले का उत्पादन प्रतिदिन हो रहा था वह अब बारिश के चलते चार लाख टन हो गया हैं। खदानो में पानी निकालने की व्यवस्था की गई हैं, बावजूद इसके लगातार बारिश होने की वजह से खदान के कुछ क्षेत्रों में पानी भर गया हैं, लगातार बड़े-बड़े मोटर पंप से पानी निकालने का काम चल रहा हैं। इस बीच भारी भरकम वाहनों के चक्के उसमे फंस जा रहे हैं। हर वर्ष मानसून शुरू होने के साथ ही कोयला खदानों में उत्पादन प्रभावित होने लगता हैं। इसे मद्देनजर रखते हुए कोल इंडिया और एसईसीएल के उच्च अधीकारियों की निगरानी में खदान से पानी निकालने की व्यवस्था बनाई गई थी, किंतु लगातार हो रही बारिश ने तमाम व्यवस्था को प्रभावित कर दिया, हालांकि खदान में पानी भरना स्वभाविक हैं लेकिन जल भराव से कैसे निपटा जाए यह मुख्य बात होती हैं।
पिछले दिनों कोरबा जिले में हुई लगातार बारिश ने यहां के कोयला उत्पादन को भी प्रभावित कर दिया हैं जहां 24 घंटे में 6 लाख टन उत्पादन होता था एक जानकारी के अनुसार वह घटकर 4 लाख टन हो गया हैं। यह उत्पादन भी बड़ी कोशिश के बाद हो रहा हैं इसके लिए अधिकारियों और कर्मचारियों को सुरक्षा व्यवस्था के साथ जुझना पड़ रहा हैं। जानकारी के अनुसार देश की बसे बडी गेवरा कोयला खदान में कोयला उत्पादन कम होने से इसका सीधा असर कोयला आपूर्ति पर पड़ता हैं। वर्तमान में उक्त तीनों मेगा प्रोजेक्ट पर बारिश का असर देखा जा सकता हैं।
वर्ष 2021 में दीपका कोयला खदान में लीलागर नदी का पानी भर गया था, पानी भरने से खदान झील बन गई थीं। खदान का 80 प्रतिशत हिस्सा जलमग्न होने के कारण करीब तीन माह कोयला उत्पादन का कार्य बंद रहा। इस तरह ही घटना दुबारा न हो इस बात पर कोल इंडिया और एसईसीएल के अधिकारियों का विशेष ध्यान हैं। इसके लिए 24 घंटे कर्मचारियों की तैनाती की गई हैं जो पल-पल की रिपोर्ट उच्च अधीकारियों को दे रहे हैं।
एसईसीएल के निदेशक तकनीक एस.एन. कापरी एवं जयकुमार फ्रेंकलिन ने कुसमुंडा व दीपका मेगा प्रोजेक्ट का आकस्मिक निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों ने खदान के नीचे उतर स्थिति का जायजा लिया। मानसून में पानी भराव न हो, इसके लिए खदान में किए गए आवश्यक उपाय को देखा। बताया जा रहा है कि कुसमुंडा खदान में पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने की वजह से अधिकारियों ने नाराजगी जताई। उन्होंने पानी निकासी के लिए समुचित व्यवस्था करने कहा ताकि उत्पादन पर किसी तरह का असर न पड़े। इसके साथ ही एसईसीएल सेफ्टी बोर्ड के सदस्य भी कुसमुंडा खदान पहुंचे और खदान में अपनाए जा रहे सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण किया।





















