
कोरबा। अरसे बाद शहर में एक बार फिर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपनी उपस्थिति दर्ज करायी। नगर निगम के वार्ड क्रमाक-2 साकेत नगर अंतर्गत तुलसीनगर डीडीएम स्कूल रोड पर ईडी ने जे.पी.अग्रवाल के घर पर दबिश दी। सुबह पहुंची ईडी की कार्रवाई की भनक लगने के साथ इलाके में कई तरह की खबरें शुरू हो गई। इसके अलग-अलग अर्थ निकाले जा रहे हैं।
विधानसभा चुनाव से पहले कोरबा में कई मौके पर ईडी के द्वारा कार्रवाई की गई थी। उस दौरान अधिकारियों से लेकर कारोबारियों पर उसका निशाना रहा। अबकी बार कोरबा के बड़े कारोबारी जे.पी. अग्रवाल ईडी के निशाने पर हैं। वे लायंस इंटरनेशनल के पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रहे हैं और वर्तमान में एमजेएफ स्तर के पदाधिकारी हैं। म्यूनिसिपल कार्पोरेशन में उनके बड़े काम हैं इसलिए उनकी नगर सहित जिले में अपनी अलग पहचान है। प्राप्त खबरों में दावे किये जा रहे हैं कि कोरबा जिला खनिज न्यास के अंतर्गत कराए गए कई कार्यों में उनकी फर्म शामिल रही है। कामकाज को लेकर हुई शिकायतों को इस छापे का एक आधार बताया जा रहा है जबकि यह भी दावा किया जा रहा है कि छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव के दौरान महादेव सट्टा एप की खूब चर्चा हुई और इसके माध्यम से 500 करोड़ से ज्यादा की रकम को यहां-वहां ठिकाने लगाने के मामले सामने आए। इस चक्कर में उस समय भी प्रवर्तन निदेशालय ने संज्ञान लिया था। फौरी तौर पर हुई जांच में कई लोग नपे थे और इसके मुख्य सूत्रधार ने कई अहम खुलासे पूछताछ में करने के साथ सरकार जांच एजेंसी को चौकाया था। खबर के अनुसार कोरबा में 1 मार्च की तडक़े हुई कार्रवाई को लेकर कहा जा रहा है कि महादेव एप में जे.पी. के पुत्र का नाम आने के कारण यहां भी ईडी की धमक हुई है लेकिन वास्तविकता क्या है यह खुद कार्रवाई के बाद ईडी की ओर से सार्वजनिक की जाने वाली अधिकृत जानकारी के साथ ही स्पष्ट हो सकेगी।
पुराने अंदाज में आए अधिकारी
सुरक्षा बल के साथ ईडी के अधिकारी इस बार भी पुराने अंदाज में कोरबा पहुंचे। वे सुबह लगभग 5.30 के आसपास डीडीएम रोड स्थित जे.पी. अग्रवाल के निवास पर पहुंचे। दो इनोवा कार में 9 अधिकारी यहां पहुंचे। मॉर्निंग वॉक करने निकले लोगों को समझते देर नहीं लगी कि माजरा क्या है। कुछ देर बाद और भी लोगों ने यहां-वहां फोन खडख़ड़ाया। जिसके बाद माजरा स्पष्ट हो गया कि ईडी की धमक यहां पर हुई है। इसके साथ ही अटकलों का बाजार गर्म हो गया। याद रहे कोरबा में पिछले वर्ष ईडी के चक्कर में माइनिंग विभाग के पूर्व उप संचालक एस.एस.नाग और पूर्व कलेक्टर रानू साहू आ चुके हैं। खनिज लेबी और डीएमएफ के मामले में इन्हें जेल की हवा खानी पड़ी है।


























