वाडिया के विज्ञानी सिलक्यारा पहुंचे, आज से शुरू करेंगे काम, मजदूरों को जल्दी निकालने की उम्मीद जगी

उत्तरकाशी, २१ नवंबर । वर्टिकल ड्रिलिंग के नए विकल्प को आसान बनाने के साथ ही वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के विशेषज्ञ सुरंग के बाधित हिस्से पर हारिजांटल (क्षैतिज) ड्रिलिंग की चुनौती को दूर करने की दिशा में मदद करेंगे। इसके लिए संस्थान के दो वरिष्ठ विज्ञानी सोमवार देर शाम सिलक्यारा पहुंच गए हैं। वह अपना काम शुरू कर देंगे।वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के निदेशक डा. कालाचांद साईं ने केंद्र व राज्य सरकार के निर्देश पर वरिष्ठ विज्ञानी डॉ गौतम रावत और डॉ बप्पा मुखर्जी को सिलक्यारा भेजा है। बताया जा रहा है कि दोनों विज्ञानी मंगलवार से अपना काम शुरू कर देंगे।\अभी उनके कार्यों को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आ सकी है, लेकिन इतना जरूर है कि पहले विज्ञानी सुरंग की पहाड़ी पर वर्टिकल ड्रिलिंग के स्थलों का निरीक्षण करेंगे। वह देखेंगे कि ड्रिलिंग वाले स्थान पर चट्टानों की प्रकृति क्या है और सुरंग तक ड्रिल करने में बीच में किसी तरह की बाधा तो नहीं आएगी। इसके लिए संभवत: रेसिस्टिविटी सर्वे आदि का कार्य भी किया जा सकता है। ताकि ड्रिलिंग शुरू करने से पहले चट्टानों व भूगर्भ की समुचित जानकारी मिल सके। इसके अलावा विज्ञानी यह पता करने का प्रयास भी करेंगे कि सुरंग में भूस्खलन से बाधित हिस्से में क्षैतिज ड्रिलिंग में बार-बार बाधा क्यों पहुंच रही है। वाडिया संस्थान की उपस्थिति के बाद राहत और बचाव अभियान को और गति मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। ड्रिलिंग के लिए अपनाए जा रहे दूसरे विकल्पों पर काम के लिए ओएनजीसी से भी मदद मांगी गई है। ओएनजीसी के विशेषज्ञों ने भी इस दिशा में प्रयास तेज कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि जरूरत पडऩे पर ओएनजीसी से बड़कोट वाले हिस्से से ड्रिलिंग कराई जा सकती है। ओएनजीसी के विशेषज्ञों ने भी इसके लिए धरातलीय प्रयास शुरू कर दिए हैं।संस्थान के विशेषज्ञों ने वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान से सुरंग क्षेत्र का जियोलाजिकल मैप प्राप्त कर लिया है। इसके माध्यम से यह पता करने में मदद मिलेगी कि संबंधित क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति क्या है और यहां किस तरह की चट्टानों की बहुलता है। ताकि उसी के हिसाब से ड्रिलिंग की तकनीक पर आगे बढ़ा जा सके।

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