
कोरबा । कोरबा लोकसभा क्षेत्र में कांग्रेस प्रत्याशी के लिए वामपंथी संगठनों ने चुनाव प्रचार करना तय किया है।
जिला कांग्रेस कमेटी जिलाध्यक्ष द्वय ग्रामीण व शहर सुरेन्द्र प्रताप जायसवाल और सपना चौहान ने संयुक्त रूप से पत्र लिखते हुए कोरबा जिले के ग्रामीण व शहरी क्षेत्र के समस्त जिला पदाधिकारियों व संगठन से जुड़े समस्त प्रकोष्ठों व विभागों के पदाधिकारियों से लोकसभा चुनाव 2024 में कोरबा लोगसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी श्रीमती ज्योत्सना चरणदास महंत को प्रचंड मतों से विजयी बनाने के लिए इंडिया एलॉयंस के सभी घटक दलों के पदाधिकारियों व सदस्यों के साथ मिलकर व्यापक पैमाने पर प्रचार- प्रसार करने की अपील किया है।
ये संहितायें मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी/वेतन तक से वंचित करती है और मालिकों को 12 घंटे तक मजदूरों से काम लेने का और उन्हें किसी भी समय रोजगार से निकालने का अधिकार देती है। पत्र में आगे लिखा गया है कि वर्तमान में केन्द्र में संचालित भाजपा सरकार की इस व्यवस्था से मजदूर फिर से बंधुआ गुलामी की जंजीर में जकड़ गए हैं। सरकारी कर्मचारियों के पेंशन फंड को सट्टा बाजार के हवाले कर दिया गया है और पुरानी पेंशन योजना को खत्म करके उन पर एक ऐसी नई योजना लाद दी गई है, जिसमें उनको जीवन निर्वाह योग्य पेंशन की राशि नहीं मिल रही है। इस व्यवस्था से छतीसगढ़ के 4 लाख कर्मचारी इससे प्रभावित होने जा रहे हैं। राज्य के विभिन्न विभागों में कार्यरत 6.57 लाख से ज्यादा मजदूर, जिनमें संविदाकर्मी, ठेका मजदूर, आउटसोर्सिंग कर्मचारी और असंगठित क्षेत्र के मजदूर खास तौर से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मध्यान्ह भोजन बनाने वाले मजदूर, सफाई कर्मचारी आदि को नियमित करने के चुनावी वादे पर आज राज्य की भाजपा सरकार ने चुप्पी साध ली है। पत्र में मोदी के वादे को लेकर लिखा गया है कि मोदी का वादा तो देश को आत्मनिर्भर बनाने का था, लेकिन उसकी अंधाधुंध निजीकरण और विनिवेशीकरण की नीतियों ने अर्थव्यवस्था को कमजोर करने और देश की बहुमूल्य संपत्ति को कार्पोरेटों को सौंपने का काम किया है। वादा तो सबका विकास था, हकीकत में हो रहा है कार्पोरेटों का विकास। इन नीतियों से गरीब, और गरीब हुए हैं, जबकि देश के सबसे अमीर 10 लोगों का हमारी राष्ट्रीय आय के 57 प्रतिशत और कुल संपत्ति के 77 प्रतिशत पर कब्जा हो गया है। भाजपा का फिर से सत्ता में आने का मतलब होगा देश से भाईचारा, सद्भाव और सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्षता के मूल्यों की विदाई और वर्ण व्यवस्था पर आधारित समाज की पुनर्स्थापना की ओर बढऩा, जो भाजपा-आरएसएस की वास्तविक विचारधारा है। छत्तीसगढ़ में सत्ता में फिर से आने के बाद भाजपा ने बेरोजगारी भत्ता देने और न्याय योजनाओं के जरिए आम जनता को राहत देने जैसी तमाम योजनाओं को एक झटके में बंद कर दिया है।
एक ओर तो देश में मोदी सरकार की तमाम गारंटियां फेल हो गई है, वही छत्तीसगढ़ में जिन गारंटियों को लागू करने का दिखावा किया जा रहा है, वह केवल चुनाव जीतने की तिकड़बाजी है। राज्य की सभी 11 लोकसभा क्षेत्रों में उसकी निर्णायक हार सुनिश्चित की जाएं।वास्तव में यह चुनाव तुच्छ मतभेदों से ऊपर उठकर देश, लोकतंत्र और संविधान बचाने की एक बड़ी राजनैतिक लड़ाई है। इस लड़ाई को सफल बनाने के लिए जरुरी है कि यथासंभव भाजपा विरोधी वोटों को बिखरने से रोका जाएं और सभी ताकतें उस राजनैतिक पार्टी को समर्थन देंजो भाजपा को हरा सकने में सक्षम हो। छत्तीसगढ़ में यह ताकत केवल कांग्रेस पार्टी के पास है, जो भाजपा गठबंधन के विकल्प के रूप में उभर रही इंडिया समूह का हिस्सा है। अतएव राज्य स्तर पर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और कोयला श्रमिक संघ (सीटू), ने आम जनता से अपील करते हुए उद्योग, रक्षा, संविधान रक्षा हो सके।
























