विजयदशमी पर बुराई के प्रतीकों का दहन, काफी भीड़ जुड़ी

जांजगीर । असत्य पर सत्य की जीत का पर्व विजयादशमी धुमधाम से मनाया गया। लेकिन इस बार आचार संहिता के साए में मनाया गया। पिछले साल इस बार रावण पुतला का कद भी कम किया गया। साथ ही रात 10 बजे तक कार्यक्रम को खत्म किया गया। इस बार आचार संहिता के कारण जनप्रतिनिधि कार्यक्रम से दूरी बनाए रहे। वियजादशमी पर अंचल में जगह-जगह असत्य व अहंकार के प्रतीक रावण का पुतला दहन किया गया।
शहर मेंं दशहरा का मुख्य कार्यक्रम हाईस्कूल मैदान में हुआ। पुरानी बस्ती से भगवान राम की झांकी करमा पार्टी के साथ शाम 7 बजे निकली। रामजी की सवारी नगर भ्रमण करते हाईस्कूल मैदान पहुंची, जहां 40 फीट के रावण का दहन कर असत्य पर सत्य की जीत का जश्न मनाया गया। रावण दहन के पूर्व आकर्षक रंग बिरंगी व मनमोहक आतिशबाजी का नजारा रहा। हाईस्कूल मैदान के दशहरा का मुख्य कार्यक्रम होने से यहां बड़ी तादाद में लोग पहुंचे थे। मैदान के बाहर व अंदर लगे खिलौने व खाने-पीने के सामान की दुकानें लगी थीं। दुकानों में लोगों ने जमकर खरीदी की, जिससे मेले जैसा माहौल लग रहा था। बच्चों ने भी अपने-अपने स्तर पर छोटे आकार के रावण पुतले का दहन किया। मोहल्लों में भी बच्चों की टोलियों ने मेहनत कर रावण का पुतला बनाया था। शाम होते ही जगह-जगह बच्चों को रावण दहन करते देखा गया। नगर में मुख्य रूप से तीन स्थानों में बड़े स्तर पर रावण पुतला का दहन किया जाता है। हाईस्कूल मैदान में नपा द्वारा आयोजित विजयादशमी उत्सव रावण का पुतला जलाकर दशहरा उत्सव मनाया गया। भाठापारा में आज बुधवार 25 अक्टूबर को रावण का पुतला जलाया जाएगा। नगर में मुख्य रूप से तीन स्थानों में बड़े स्तर पर रावण पुतला का दहन किया जाता है। हाईस्कूल मैदान में नपा द्वारा आयोजित विजयादशमी, टीसीएल कॉलेज में मनाया जाएगा। भाठापारा में एक दिन बाद रावण का पुतला जलाया जाएगा।
पुलिस की रही चाक चौबंद व्यवस्था
आचार संहिता के कारण इस बार हाईस्कूल मैदान में दशहरा उत्सव को लेकर पुलिस ने चाक-चौबंद व्यवस्था कर ली थी। यहां पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई थी। हाईस्कूल मैदान में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जिले की पुलिस सुबह से ही चौकन्नी रही। साथ ही कार्यक्रम को जल्दी कराया गया। ताकी ज्यादा भीड़ और कार्यक्रम में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
सोनपत्ती देकर लिया आर्शीवाद
दशहरा के दिन सोनपत्ती का भी विशेष महत्व है। रावण दहन के बाद माता को सोनपत्ती देकर आर्शीवाद लेने का रिवाज है। मान्यता है कि रावण का वध करने के बाद अयोध्या पहुंचने पर भगवान राम ने माता कौशिल्या को सोनपत्ती भेंट किया था।
नीलकंठ के किए दर्शन
विजयादशमी के दिन नीलकंठ पक्षी का दर्शन शुभ माना जाता है। सुबह से लोग शहर के बाहर एकांत स्थान व खेतों की ओर नीलकंठ पक्षी के दर्शन के लिए निकल गए। ऐसी मान्यता है कि इस दिन नीलकंठ के दर्शन कर मांगी गई मन्नत पूरी हो जाती है।

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