
नई दिल्ली। विज्ञानियों का का कहना है कि अनियंत्रित निर्माण, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन के कारण सिक्किम में तबाही मची थी। वैज्ञानिकों ने चेताया है कि हिमनदों की संख्या में वृद्धि के कारण हिमालय क्षेत्र की अन्य राज्यों में भी ऐसी और आपदाएं आ सकती हैं। इस महीने की शुरुआत में सिक्किम में अचानक आई बाढ़ से हजारों लोग विस्थापित हुए से कम 60 लोगों की मौतें हुई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर सहित अन्य हिमालयी राज्य भी हिमनद झील बाढ़ जैसे खतरे में हैं। हिमनद झील बाढ़ तब आती है, जब ग्लेशियर के पिघलने से अचानक पानी उस झील से बाहर आता है।पर्यावरण विशेषज्ञ अंजल प्रकाश ने कहा कि जोखिम वाले क्षेत्रों में हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश शामिल हैं, जहां जलवायु परिवर्तन के कारण कई हिमनद झीलें तेजी से बढ़ रही हैं। विशेषज्ञ जीएलओएफ के लिए पिघलते ग्लेशियर को जिम्मेदार मानते हैं, जो क्षेत्र में प्रदूषण और अनियंत्रित निर्माण के कारण बढ़ते तापमान का परिणाम है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, इंदौर के एसोसिएट प्रोफेसर आजम ने कहा,उन्होंने कहा कि 2013 की केदारनाथ आपदा में भी यही स्थिति थी, जहां हिमनद झील उफान पर आ गई और तबाही मची थी, और शायद सिक्किम में भी यही हुआ था। शोधकर्ता रीना शाह ने बताया कि हालांकि अध्ययनों ने वर्षा और भूकंप को जीएलओएफ के संभावित कारणों के रूप में बताया गया है, लेकिन यह निश्चित रूप से निर्धारित करना चुनौती बनी हुई है कि किस कारक का इस पर अधिक महत्वपूर्ण प्रभाव है।’नेचर’ पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन से पता चला है कि सदी के अंत तक पृथ्वी के 2,15,000 ग्लेशियर में से आधे के पिघलने की आशंका है, भले ही ग्लोबल वार्मिंग 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित हो। यह स्थिति की गंभीरता को रेखांकित करता है।






















