
कोरबा। कोरबा से 5 किमी दूर भालूसटका गांव में सब स्टेशन के निर्माण के दौरान राखड़ का उपयोग करना विद्युत विभाग को काफी महंगा पड़ गया है। पिछले पांच दिनों से हुई लागातार बारिश के कारण सब स्टेशन राखड़ से पट गया। पिछले तीन दिनों से सब स्टेशन में मौजूद राख को निकालने का प्रयास किया जा रहा है।
कोरबा का विद्युत विभाग इन दिनों काफी परेशान चल रहा है। विभाग की परेशान की वजह कुछ और नहीं कुछ और नहीं बल्की भालूसटका गांव के पास बना सब स्टेशन है,जो पिछले पांच दिनों की बारिश में राखड़ से पट गया है। सब स्टेशन निर्माण के दौरान गहराई को भरने के लिए राखड़ का उपयोग किया गया था। मूसलाधार बारिश के कारण राख बाहर गया और पूरे सब स्टेशन में फैल गया। जेसीबी,ट्रक और ट्रेक्टर के माध्यम से राखड़ को निकालने का काम जारी है,लेकिन अब तब कार्य पूरा नहीं हो सका है। तीनों दिनों से राख को निकालने का काम किया जा रहा है,जो अब भी जारी है। विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारी और ग्रामीणों ने बताया कि मनमानी तरीके से फ्लाई ऐश को डंप करने से यहां पर समस्याएं बढ़ गई हैं। बारिश के मौसम में दबाव से फ्लाई ऐश बहते हुए आसपास के क्षेत्र में फेल रहा है। इसके चलते समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। इस बात को लेकर भी नाराजगी बनी हुई है कि आखिर किसके कहने पर इस प्रकार की हरकतें ट्रांसपोर्टर और उनके लोगों की ओर से की जा रही है। याद रहे इससे पहले भी कोरबा शहर के आसपास के क्षेत्र में विभिन्न बिजली घरों से उत्सर्जित फ्लाई ऐश को मनमाने तरीके से डंप करने और लोगों को परेशान करने की घटनाएं हो चुकी हैं। कोरबा के कुछ जागरूक लोगों के द्वारा जन स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ मुद्दा बात कर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की भोपाल स्थित बेंच में परिवाद दायर किया गया था, जिस पर जांच समिति कोरबा भेजी गई। इस मामले में बहुत ज्यादा परिणाम सामने नहीं आ सके और एक प्रकार से फ्लाई ऐश डंप करने वाले ट्रांसपोर्टर को बचाने की कोशिश की गई। माना जा रहा है कि इस प्रकार की कारस्थानी के कारण ही फ्लाई ऐश डंप करने वाले लोगों के मनोबल में बढ़ोतरी हो रही है और वह मनचाहे तरीके से कहीं भी अपने काम को अंजाम देने में लगे हुए हैं।

























