
लखनऊ, २७ नवंबर । विधान भवन में कांग्रस और बसपा विधानमंडल दलों के लिए आवंटित बड़े कार्यालय वापस ले लिए गए हैं। विधानमंडल में इन दोनों पार्टियों का संख्याबल कम होने के कारण अब दोनों दलों को छोटे केबिन आवंटित किए गए हैं। वहीं, समाजवादी पार्टी के विधायकों की संख्या अधिक होने की वजह से कांग्रेस व बसपा के पहले आवंटित कार्यालय अब सपा को दे दिए गए हैं। ऐसे में अब नेता प्रतिपक्ष का कार्यालय सपा विधानमंडल दल कार्यालय के पास स्थानांतरित हो गया है।कांग्रेस पार्टी के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है, जब विधानमंडल के भीतर उनका वर्षों पुराना बड़ा कार्यालय छिन गया है। कांग्रेस के अब विधानसभा में दो सदस्य हैं जबकि विधान परिषद में अब उसका एक भी सदस्य नहीं रह गए हैं। वहीं, बसपा के विधानसभा में एक विधायक हैं जबकि उच्च सदन में भी एक सदस्य बचे हैं। नियमानुसार ऐसे दल जिनकी सदस्य संख्या 25 या उससे अधिक है, उन्हें सचिवालय द्वारा कक्ष, चपरासी, टेलीफोन आदि उन शर्तों के साथ दिए जा सकते हैं, जिन्हें विधानसभा अध्यक्ष निर्धारित करते हैं। 25 से कम सदस्यों वाले दलों को कक्ष और अन्य सुविधाएं देने का प्रावधान नहीं है। हालांकि इस मामले में अंतिम निर्णय का अधिकार विधानसभा अध्यक्ष के पास होता है।समाजवादी पार्टी कार्यालय के पास ही अब नेता प्रतिपक्ष का भी कार्यालय कर दिया गया है। अभी तक यह कार्यालय नेता सदन कार्यालय की ही पंक्ति में था। विधानमंडल में एक बड़े हाल को छह हिस्सों में बांटकर बसपा, कांग्रेस के साथ ही निषाद पार्टी, रालोद व अपना दल को केबिन आवंटित कर दिए हैं। बसपा, कांग्रेस को जल्द ही छोटे कक्ष आवंटित किए जाएंगे।




















