जांजगीर चांपा। विगत दिनों 22 जुलाई सोमवार को भारतीय डाक विभाग के विलासपुर संभाग के उपसंभाग जांजगीर के अंतगर्त संदीपनी विज्ञान संसधान महाविद्यालय राहौद शाखा डाकघर में डाक चौपाल कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यकर्म में मुख्य अतिथि के रूप में गुलाब सिंह चंदेल भाजपा जिलाध्यक्ष जिला जांजगीर चांपा के साथ महाविद्यालय के संचालक एवं संस्थापक संतोष गुप्ता,उपसंभागीय निरीक्षक (डाक) जांजगीर उपसंभाग, रवि साहू एवम इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक, बाम्या ब्रांच के मेनेजर भरत तथा समूचा महाविद्यालय स्टाफ जे.पी. साहू, अश्वनी साहू, मालिनी गुप्ता श्रीमती सविता वारले सुनीता बर्मन नेहा चंद्राकर, राजेश यादव, पी. आदिले, चित्र कुमार, दीना, संगीता, दिनेश, गीता टंडन, वरिन्द्र, हेमदत्त सोनवान विद्यार्थी गण, भारती, समीर, अमरीका, पूजा, ज्योति, महेश्वरी, प्रीति, संदीप, सागर सूर्यप्रकाश, गरिमा, सुषमा, पिकी, रामकुमार व खरौद, शिवरीनारायण उपडाकघर के अंतर्गत आने वाले सभी जीडीएस के साथ पंचराम खुटे अमित कुमार कौशिक डाक अधिदर्शक जांजगीर नवीन अग्रवाल, कैलाश अग्रवाल आदि नगरवासी उपस्थित रहे।
डाक चौपाल में शामिल रहे आईपीपीबी ब्रांच मैनेजर भरत जी द्वारा आईपीपीबी के द्वारा पोस्ट ऑफिस में डिजिटल लेन देन व सभी शासकीय योजनाओं के डीबीटी के माध्यम से भुगतान के बारे में बताया गया। रवि साहू एसडीआईपी जांजगीर द्वारा डाक घर के विभित्र बचत योजनाओ को विस्तार पूर्वक बताया गया। मुखा अतिधि गुलाब सिंह चंदेल द्वारा डाकघर के विभित्र योजनाओं के साथ साथ पोस्ट कार्ड, आरपीएलआई बीमा एवं डिजिटल तेन देन के बारे में विस्तार पूर्वक बताया गया। विशिष्ट अतिथि संतोष गुप्ता महाविद्यालय के निदेशक द्वारा महाविद्यालय के 600 छात्र छात्राओ का प्रति विद्यार्थी एक-एक लाख दुर्घटना बीमा कराया गया।
डाक विभाग भारत सरकार के निर्देश पर छत्तीसगढ़ राज्य के बिलासपुर संभाग के जिला- जांजगीर-चाम्पा का यह प्रथम डाक चौपाल आयोजित हुआ जिसमें डाक विभाग के सभी योजनाओ को महाविद्यालय प्रांगण में बताया गया।
डाक चौपाल में शामिल सभी जीडीएस ने वहां उपस्थित जनसमुदाय को सभी डाकघर के पोजनाओं के बारे में अवगत कराया । उक्त वृहत डाक चौपाल में लगभग 15 लाख ग्रामीण डाक जीवन बीमा, 14 सुकन्या खाता, 10 बचत खाता 3 महिला सम्मान खाता 8 आरडी, 1 पीपीएफ खाता, 29 एसबीपीआरएम और 1जीएजी प्राप्त हुआ । उक्त कार्यक्रम को सफल बनाने में शाखा डाकपाल राहोद श्री पारसमणि केशरवानी का विशेष योगदान रहा।