सपा में सेंध लगाकर भाजपा ने जिताए आठों प्रत्याशी सफल रही पार्टी के उम्मीदवारों को जिताने की रणनीति

लखनऊ, २८ फरवरी । उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की 10 सीटों के लिए मंगलवार को हुए चुनाव में समाजवादी पार्टी पर बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए भारतीय जनता पार्टी अपने आठों प्रत्याशियों को जिताने में सफल रही। वहीं अपने खेमे में सेंधमारी से प्रभावित सपा के तीन में से दो प्रत्याशी ही राज्यसभा की देहरी लांघने में कामयाब हो सके जबकि उसके तीसरे उम्मीदवार और प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन को हार का सामना करना पड़ा। विधान सभा में सपा के मुख्य सचेतक मनोज कुमार पांडेय समेत पार्टी के सात विधायकों ने पाला बदल कर भाजपा के पक्ष में मतदान किया।वहीं सपा भाजपा के सहयोगी दल सुभासपा के एक विधायक का वोट झटकने में सफल रही। जेल में बंद तीन विधायकों के अलावा अमेठी की सपा विधायक महाराजी प्रजापति वोट डालने नहीं आईं। चुनाव जीतने वाले भाजपा प्रत्याशियों में सर्वाधिक चर्चित रहे संजय सेठ जहां तीसरी और पार्टी के वरिष्ठ राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. सुधांशु त्रिवेदी दूसरी बार संसद के उच्च सदन में पहुंचे हैं। वहीं कांग्रेस छोड़कर आए पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री आरपीएन सिंह, मथुरा के पूर्व सांसद चौधरी तेजवीर सिंह, पूर्व राज्य मंत्री डॉ.संगीता बलवंत, मुगलसराय की पूर्व विधायक साधना सिंह, भाजपा के प्रदेश महामंत्री अमरपाल मौर्य और आगरा के पूर्व महापौर नवीन जैन के लिए राज्यसभा में दाखिले का यह पहला अवसर होगा। विजयी सपा प्रत्याशियों में जया बच्चन की राज्यसभा में यह पांचवीं पारी होगी जबकि पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रामजी लाल सुमन पहली बार संसद के उच्च सदन के सदस्य होंगे। भाजपा के सभी प्रत्याशियों की जीत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की रणनीति को अहम माना जा रहा है। पार्टी को आठों प्रत्याशियों को जिताने के लिए 296 वोट चाहिए थे जबकि सहयोगी दलों सहित उसके पास 10 वोट कम थे।इसके बावजूद भाजपा प्रत्याशियों ने कहीं अधिक वोट हासिल करने में कामयाब रहे। राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान की अवधि सुबह नौ से शाम चार बजे तक निर्धारित थी लेकिन मतदान तय समयावधि से लगभग सवा घंटा पहले ही समाप्त हो गया था। विधान भवन परिसर स्थित तिलक हाल में हुए चुनाव में विधानसभा के 399 सदस्यों में से 395 ने वोट डाले। राज्यसभा चुनाव के लिए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर से सोमवार शाम बुलाई गई बैठक और रात्रिभोज से कन्नी काटने वाले सपा के आठ में से छह विधायकों ने भाजपा प्रत्याशी संजय सेठ के समर्थन में वोट डाले। सपा से बगावत कर भाजपा की राह आसान करने वाले इन विधायकों में मनोज कुमार पांडेय, राकेश पांडेय, राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह, विनोद चतुर्वेदी और पूजा पाल शामिल हैं। इस फेहरिस्त में बदायूं की बिसौली सीट के सपा विधायक आशुतोष मौर्य का नाम भी जुड़ गया जिन्होंने अपनी पार्टी से मुंह मोड़कर भाजपा के पक्ष में वोट दिया। अमेठी की सपा विधायक और पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति की पत्नी महाराजी प्रजापति वोट डालने नहीं आईं। वहीं सपा प्रत्याशियों के चयन में पीडीए (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए राज्यसभा चुनाव में मतदान न करने की घुड़की देने वाली सिराथू की सपा विधायक पल्लवी पटेल ने अंततोगत्वा सपा उम्मीदवार रामजी लाल सुमन को वोट दिया।जहां भाजपा ने सपा में बड़ी सेंध लगाई, वहीं सपा भाजपा के सहयोगी दल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के एक विधायक का वोट हासिल करने में कामयाब रही। सोमवार को हुई भाजपा व सहयोगी दलों की बैठक में अनुपस्थित रहे जौनपुर की जफराबाद सीट से सुभासपा विधायक जगदीश नारायण राय ने सपा के पक्ष में मतदान किया। कांग्रेस के दोनों विधायकों ने सपा को वोट दिया, तो विधानसभा में बसपा के इकलौते सदस्य उमाशंकर सिंह ने भाजपा के पक्ष में मतदान किया। भाजपा को समर्थन की घोषणा पहले ही कर चुके जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के अध्यक्ष रघुराज प्रताप सिंह और उनकी पार्टी के दूसरे विधायक विनोद सरोज ने भी कमल खिलाने में मदद की। जेल में बंद सपा विधायक रमाकांत यादव व हाजी इरफान सोलंकी और सुभासपा विधायक अब्बास अंसारी वोट डालने की अनुमति न मिल पाने के कारण मतदान में हिस्सा नहीं ले सके।वैसे तो हर प्रत्याशी को जीत के लिए 37 वोट चाहिए थे लेकिन चार विधायकों के मतदान न करने से जीत का कोटा घटकर 36 वोटों पर आ गया। शाम पांच बजे तिलक हाल में मतगणना शुरू होने पर सपा विधायक शहजिल इस्लाम अंसारी का मतपत्र अमान्य पाया गया।प्रथम वरीयता के वोट पाकर भाजपा प्रत्याशी आरपीएन सिंह, डॉ.सुधांशु त्रिवेदी, चौधरी तेजवीर सिंह, डॉ.संगीता बलवंत, साधना सिंह, अमरपाल मौर्य व नवीन जैन तथा सपा उम्मीदवार जया बच्चन और रामजी लाल सुमन विजयी हुए। वहीं समाचार लिखे जाने तक भाजपा प्रत्याशी संजय सेठ प्रथम वरीयता के 29 वोट पाकर सपा के तीसरे उम्मीदवार आलोक रंजन से आगे थे। आलोक रंजन को पहली वरीयता के 19 वोट मिले। देर रात तक चली दूसरी वरीयता के वोटों की गिनती में संजय सेठ को 14 और वोट मिले जबकि आलोक रंजन को आठ। इस तरह सेठ को कुल 43 और रंजन को 27 वोट मिले।शाम पांच बजे मतों की गिनती शुरू होते ही सपा की ओर से भाजपा विधायक नीलरतन पटेल द्वारा मतदान स्थल से बाहर वोट देने का मुद्दा उठाते हुए मतगणना रोकने की मांग की गई। इस पर रिटर्निंग अफसर ब्रजभूषण दुबे की ओर से भारत निर्वाचन आयोग को सपा की आपत्ति भेजी गई। निर्वाचन आयोग ने सपा की आपत्ति खारिज कर दी। इसके बाद शाम 6.50 बजे ही मतगणना दोबारा शुरू हो पाई।

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