
गाजियाबाद, १८ जनवरी । प्रदेश के सभी नगर निकायों में संविदा पर काम करने वाले कर्मचारी की सीवर या सेफ्टीटैंक की सफाई के दौरान मौत हो जाती है तो उसके स्वजन को 30 लाख रुपये की धनराशि दी जाएगी।अभी तक मुआवजे के तौर 10 लाख रुपये की धनराशि दी जाती थी। यह निर्देश प्रमुख सचिव ने प्रदेश के सभी नगर निकायों को दिए हैं। करीब चार माह पहले सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान यह निर्देश सभी राज्यों को दिए थे। नगर निकायों में संविदा पर काम करने वाले सफाईकर्मियों के साथ सीवर और सेफ्टीटैंक की सफाई के दौरान अक्सर दुर्घटनाएं हो जाती हैं। इन हादसों में उनकी मृत्यु तक हो जाती है। इससे उनके परिवार पर आर्थिक संकट आ जाता है। इसका संज्ञान लेते हुए शासन ने प्रदेश के सभी निकायों को यह निर्देश दिए हैं कि सफाई के दौरान सफाईकर्मी की मृत्यु पर पीडि़त परिवार को 30 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। इसके अलावा सफाई के दौरान कोई कर्मचारी पूर्णरूप से दिव्यांग हो जाता हैं तो उसे मुआवजे के तौर आर्थिक सहायता के तौर पर 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। यदि सीवर और सेफ्टीटैंक की सफाई करने के दौरान कोई संविदाकर्मचारी आंशिक रूप से दिव्यांग हो जाता है तो उसे आर्थिक सहायता के तौर पर दस लाख रुपये की मुआवजा राशि दी जाएगी। ज्यादातर नगर निकायों में निजी कंपनियों को सीवर व सैप्टिक टैंक की साफ-सफाई का कॉन्ट्रेक्ट दिया है। नगर निगम या नगर पालिका के अधिकारी शासन के आदेश का हवाला देकर कंपनियों को बीमा कराने के लिए निर्देश देते हैं।कंपनियों द्वारा बीमा कराने के नाम पर खानापूरी की जाती है। ऐसे में कर्मचारियों को बीमा की राशि नहीं मिल पाती है। एक साल पहले खोड़ा में सैप्टिक टैंक साफ करते हुए दो कर्मचारियों की मौत हो गई थी। उन्हें कोई बीमा राशि नहीं मिली। इसी तरह जिले में कई जगह हादसों के बाद बीमा राशि नहीं दी गई।बीमा की राशि बढ़ाने पर आदेश की उल्लंघन पहले से अधिक हो सकता है। यदि नगर निगम व नगर पालिका के उच्चाधिकारी इसकी निगरानी नहीं करते हैं तो कर्मचारियों को इसका लाभ मिलना मुश्किल है। हालांकि अधिकारी बोल रहे है कि वह इस पर नियमित निगरानी करेंगे।























