
जांजगीर। जिले के गोठान में गोबर से बिजली बनाने की योजना बनाई गई थी। योजना के तहत गोठान में बायो प्लांट तैयार किया गया। प्लांट काम पूरा कर लिया है, लेकिन बायो प्लांट में बिजली उत्पाद व सप्लाई शुरू नहीं हो पाई। ऐसे में अब प्लांट बंद होता नजर आ रहा है। प्लांट से 10 किलोवाट बिजली उत्पादन कर गांव के 50 घरों तक पहुंचाने की योजना पर 34 लाख रुपए खर्च किए गए।जिले में जब योजना की शुरुआत हुई तो बायो प्लांट की क्षमता के हिसाब से गोबर से प्रतिदिन 10 किलोवाट बिजली उत्पादन करने की योजना थी। योजना से गांव के 50 घर गोबर से चलने वाले प्लांट से रोशन हो सकते थे। गोठान में बिजली बनाने के लिए लाखों रुपए खर्च हुए हैं, पर योजना अब बंद पड़ी हुई है। इसे शुरू करने पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।पूर्व सरकार ने साल 2023 में गोठान में लोगों से गोबर खरीद कर उस गोबर का उपयोग कर बिजली बनाने की योजना बनाई थी। योजना में नवागढ़ जनपद क्षेत्र में आने वाले खोखरा आदर्श गोठान में गोबर से बिजली बनाने के लिए लाखों रुपए की लागत से प्लांट तैयार किया है। उद्देश्य था कि गांव में मवेशियों के गोबर का उपयोग किया जाएगा। लोगों से गोबर की ?खरीदी की जाएगी, उन्हें रोजगार ?दिया जाएगा, लेकिन इस प्लांट से लोगों को कोई फायदा अब तक नहीं मिला है। प्लांट तैयार होने के बाद कुछ ही दिन तक ही इसे चलाया गया, बाकी अब यह योजना बंद होने के कगार पर है। क्रेडा को सौंपा प्लांट चलाने का जिम्मा ट्टखोखरा गोठान में गोबर से बिजली बनाने बायो प्लांट लगाया गया है। बायो प्लांट को चलाने की जिम्मेदारी क्रेडा को सौंपी है। प्लांट चल रहा है या नहीं, इसकी जानकारी नहीं है। आगे इस योजना पर क्या होगा, यह अभी तय नहीं हुआ है। इन पर खर्च की रकम योजना में सरकार ने करीब 34 लाख रुपए खर्च किए हैं।






















