सीमांकन के नाम पर 7 लाख की अवैध वसूली, नतीजे नही आने पर पुलिस के पास पहुंचा मामला

कोरबा। जिले में इन दिनों जमीन दलाल इतने सक्रिय हो चुके हैं कि ये पैसों के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं,फिर चाहे पैसों के लिए इन्हें कोई भी पैतरा क्यो ना अपनाना पड़े।जी हां, ऐसा ही एक ताजा मामला जिला कोरबा के थाना बांगो में आया है जहां किसान ने अपने शिकायत पत्र में जिक्र किया है कि जमीन का सीमांकन कराने के नाम पर गाँव के ही जमीन दलाल,कोटवार व पूर्व पार्षद ने मिलकर 7 लाख रुपये ले लिए हैं, न तो किसान की जमीन का सीमांकन हुआ और न ही किसान को रकम वापस हुई,वही पीडि़त किसान ने न्याय पाने बांगो पुलिस से गुहार लगाई है।पुलिस में मामले की गम्भीरता को देखते हुए संज्ञान में लिया है।
बतादे कि विकासखंड पोड़ी उपरोड़ा के ग्राम पोड़ी निवासी विशाल पटेल पिता स्व. गरजन पटेल की हक भूमि खसरा न 28/1ग रकबा 1.644 करीब 5 एकड़ भूमि ग्राम जुराली में मौजूद है जिसमे से 0.364 हेक्टेयर याने 91 डिसमिल भूमि सिंचाई नहर में अधिग्रहण हुई थी,जिसके एवज में किसान को करीब 10 लाख रुपये का मुआवजा राशि मिली थी,वही इसकी किसान की 4 एकड़ शेष भूमि आज भी मौके पर मौजूद हैं।जब गांव के जमींल दलाल कन्हैया लाल श्रीवास उर्फ ठाकुर,पूर्व कांग्रेस पार्षद शिव कुमार पटेल व गाँव के कोटवार भुजबल दास को जानकारी हुई कि विशाल पटेल को नहर में अधिग्रहण हुई भूमि का 10 लाख रुपये मुआवजा मिला है तो इन्होंने योजनाबद्ध तरीके से विशाल पटेल से मुलाकात की और विशाल को अपने झांसे में लेते हुए बाकी बची शेष भूमि का सीमांकन करा मोटी रकम में बिक्री करने की बात कही,जहां विशाल ने इन्हें कोई रिस्पांस नही दिया,इनके बार बार बोलने पर विशाल व इसका परिवार इनकी बातों में आकर शेष भूमि का सीमांकन कराने तैयार हो गया,जहां इन्होंने विशाल को बताया था कि सीमांकन कराने के लिए कुछ खर्च भी लगेगा,जो जरूरत के हिसाब से देना पड़ेगा।पोड़ी उपरोड़ा तहसीलदार के समक्ष इन्होंने विशाल की शेष भूमि का सीमांकन हेतु आवेदन भी प्रस्तुत किया,जिस पर तहसीलदार ने सीमांकन आदेश भी जारी किया पटवारी पंचनामा भी प्रस्तुत हुआ लेकिन मोके पर विशाल पटेल का कब्जा न होना बता कर सीमांकन नही हो पाया,जहां जमीन दलाल कन्हैया लाल श्रीवास उर्फ ठाकुर ने खर्चा करने की बात कही जहां इन्होंने विशाल पटेल से दिनांक 10/02/2020 को पहली किस्त में दो लाख पचास हजार रुपये व कई किस्तो में करीब दो लाख रुपये ले लिए,राशि प्राप्त करने के एवज में कन्हैया ठाकुर ने कोरे कागज में लिख कर हस्ताक्षर भी किये हैं।ऐसे तैसे फिर सीमांकन कराते हैं बोल कर इन्होंने विशाल को कई महीनों तक गुमराह किया,वही जुराली के पूर्व पार्षद शिव पटेल ने भी दिनांक 10/02/2020 को विशाल से 70 हजार रुपये लिए जहां इन्होंने भी कोरे कागज में रकम प्राप्त कर हस्ताक्षर किये हैं।इस कहानी का अध्याय यही समाप्त नही होता है बल्कि आगे और भी षडय़ंत्र तैयार था,जिसमे गाँव के कोटवार भुजबल दास ने भूमिका निभाई थी।इन्होंने नही के बराबर पढ़े लिखे किसान को उलझाने में कोई कसर नही छोड़ी।इन्होंने विशाल के स्व पिता गर्जन पटेल से वर्ष 2016 में 20 रुपये के स्टाम्प पेपर में एक इकरारनामा किया था जिसमे जिक्र था कि अगर अर्जन भूमि में विशाल के नाम से मुआवजा राशि बनती है तो ये उस राशि का आधा कोटवार को देगा और यदि कोटवार के नाम पर मुआवजा बनता है तो ये गर्जन को देगा।स्टाम्प पेपर का हवाला देते हुए कन्हैया लाल श्रीवास ने विशाल पटेल को गुमराह कर दिनांक 8/01/2020 को दो लाख रुपये कोटवार को दिलवा दिए,प्रमाण के तौर पर स्टाम्प में कोटवार ने हस्ताक्षर कर रकम ली थी।इस तरह विशाल पटेल से इन तीनो ने मिलकर करीब 7 लाख रुपये ले लिए।सूत्रों के हवाले से ये जानकारी भी है कि जुराली कोटवार भुजबल दास कोटवारी जमीन को स्टाम्प में लिखा पढ़ी कर मोटी रकम में बिक्री कर शासन को भी चुना लगाने में कोई कसर नही छोड़ रहा है अगर शासन इनके कारनामो की जांच करे तो बहुत कुछ उजागर हो सकता है.

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