सुधार के दावों के बीच लोकल गाड़ी से गई बीती हुई शिवनाथ की चाल

ट्रेनों की रफ्तार से यात्री हो रहे परेशान
कोरबा। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर रेल मंडल में आने वाले कोरबा चंपा रेल खंड पर यात्री सुविधाओं के विस्तार के लिए भले ही लगातार दावे किए जा रहे हैं लेकिन सच बात यही है कि इस रूट पर चलने वाली यात्री गाडिय़ों का भगवान ही मालिक है। गिनती की संचालित हो रही ट्रेनों से यात्रियों को उसे तरह की सुविधा नहीं मिल पा रही है जिसकी अपेक्षा की जा रही है। हालात ऐसे हैं कि वापसी के दौरान कोरबा तक विस्तारित की गई शिवनाथ एक्सप्रेस लोकल ट्रेन के मुकाबले फिसड्डी साबित हो रही है।
समय के मामले में किफायत का ध्यान रखना को लेकर लोग अपनी यात्रा पर अधिक रुपए खर्च करना उचित समझते हैं ताकि उनके कामकाज का शेड्यूल बाधित न हो। बिलासपुर से कोरबा के लिए सुबह 7:35 पर चलने वाली गेवरा रोड लोकल ट्रेन के 10 मिनट पहले रवाना होने वाली इतवारी कोरबा शिवनाथ एक्सप्रेस लोगों के लिए अच्छा विकल्प है। रेलवे के शेड्यूल के अंतर्गत इस सुबह 9 बजे कोरबा पहुंच जाना चाहिए। शिकायत है कि पिछले कुछ दिनों से यह लगातार डेढ़ से 2 घंटे लेट यहां पहुंच रहे हैं। हर रोज के तमाशे के कारण अब लोगों की नाराजगी इसे लेकर बढ़ती जा रही है हैरानी इस बात की है कि शिवनाथ से बहुत पहले लोकल ट्रेन की कोरबा में उपस्थिति दर्ज हो रही है। ऐसे में समान उठ रहा है कि इन दोनों में से बेहतर कौन है।
लटके हुए हैं कई गाडिय़ों के प्रस्ताव
जनप्रतिनिधियों का निकम्मापन कहा जाए या फिर रेलवे की हठधर्मिता, लंबा समय बीतने के बाद भी कोरबा से विभिन्न दिशाओं के लिए लंबी दूरी की डायरेक्ट ट्रेन ऑपरेट करने का काम अब तक नहीं हो सका है। रेल संघर्ष समिति कोरबा के संयोजक रामकिशन अग्रवाल ने बताया कि कोरबा से राउरकेला, कोरबा से बीकानेर और कोरबा से इंदौर के लिए सीधी ट्रेन चलाने की मांग बहुत पुरानी है। इनके लिए बेहतर सुनाओ दिए गए हैं जबकि मंत्रालय तक बढ़ाया है। यह मानवी काफी समय से की जा रही है कि 9:00 पहुंचने के बाद लगभग 10 घंटे बिलासपुर में खड़ी रहने वाली रीवा एक्सप्रेस का विस्तारित पूर्वक तक किया जाए, ऐसा होने पर हजारों लोगों को विभिन्न मार्गों के लिए एक अच्छी कनेक्टिविटी प्राप्त हो सकेगी।
केवल बात करने में अग्रणी है अधिकारी
कोरबा में रेल यात्री सुविधाओं को बेहतर किए जाने को लेकर काफी समय से लोगों की नाराजगी सामने आती रही है और उपेक्षा के आरोप रेल प्रबंधन पर लगाते रहे हैं। रेल मंडल से लेकर रेल जोन और रेल मंत्रालय स्तर के अधिकारियों तक लोगों की ओर से अपनी बात पहुंचाई गई। हर बार अधिकारियों की ओर से लोगों को मिलाकर सब कुछ ठीक किया जाएगा क्योंकि उनकी नजर में बेहद महत्वपूर्ण जगह है। लेकिन जिस तरह से व्यवस्था बनी हुई है उसे लगता है कि अधिकारी लॉलीपॉप देने के अलावा और कुछ नहीं कर सकते।

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