सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस भट्ट हुए सेवानिवृत्त, समलैंगिक विवाह के खिलाफ फैसला सुनाने वालों में थे शामिल

नईदिल्ली, २१ अक्टूबर ।
समलैंगिक जोड़ों द्वारा बच्चों को गोद लेने के अधिकार के मामले में मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ से बिल्कुल अलग और मौलिक महत्व पर फैसला देने वाली पीठ में शामिल सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एस. भट्ट शुक्रवार को सेवानिवृत्त हो गए। वह शीर्ष अदालत में चार साल से कुछ अधिक समय तक न्यायाधीश रहे। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित विदाई समारोह में जस्टिस भट ने कहा कि आज मैं इस बात से संतुष्ट हूं कि बहुत कुछ किया जा चुका है लेकिन मैं सचेत हूं कि अभी भी बहुत कुछ किया जाना शेष है। जस्टिस चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने इस सप्ताह की शुरुआत में सर्वसम्मति से समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने से इन्कार कर दिया था। पीठ ने कहा था कि कानून द्वारा मान्यता प्राप्त विवाह को छोडक़र विवाह का कोई अयोग्य अधिकार नहीं है। फैसला सुनाने वाली पीठ में जस्टिस भट भी शामिल थे। समलैंगिक विवाह को कानूनी मंजूरी न दिए जाने को लेकर सीजेआइ डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस भट्ट एक राय थे। हालांकि जस्टिस भट्ट ने समलैंगिक जोड़ों को बच्चा गोद लेने के अधिकार के मुद्दे पर बहुमत के फैसले का नेतृत्व किया था। इस फैसले में जस्टिस हेमा कोहली और जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने जस्टिस भट से सहमति व्यक्त की थी लेकिन मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की राय अलग थी।

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