हाथियों से चौतरफा मुश्किल में हैं ग्रामीण

सूरजपुर। जिले के दूरस्थ चांदनी बिहारपुर के साथ ही प्रेमनगर व प्रतापपुर इलाके में हाथियों का आतंक थमने का नाम नही ले रहा है। हाथियों के उत्पात से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। वे दर्जनों ग्रामीणों की मौत का सबब भी बन चुके हैं। वहीं फसलों को भारी नुकसान पहुंचकर ग्रामीण किसानों को लगातार आर्थिक नुकसान भी पहुंचा रहे है। हाथियों की ग्रामीण इलाकों में आवाजाही पर रोक लगा पाने में वन अमला सफल नही हो पा रहा है। वर्तमान में चांदनी बिहारपुर इलाके में फिलहाल एक हाथी और प्रतापपुर वन परिक्षेत्र में दो हाथियों ने ग्रामीणों को परेशान कर रखा है। पिछले दिनों 11 हाथियों के दल ने प्रेमनगर इलाके में तबाही मचाई थी। वर्तमान में एक हाथी बिहारपुर चांदनी इलाके के कछिया, नवडीहा गांव में फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है।
जिले के ओडग़ी विकासखण्ड अंतर्गत दूरस्थ पहाड़ी व वनांचल क्षेत्र चांदनी-बिहारपुर इलाके के साथ ही प्रतापपुर इलाके के अलावा प्रेमनगर इलाके में जंगली हाथियों का उत्पात थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी वजह से हाथियों की निगरानी करने का वन अमले का दावा खोखला साबित हो रहा है। जिससे क्षेत्र के लोगों में वन अमले के प्रति व्यापक आक्रोश व्याप्त है। तीन दिन पहले देर शाम एक हाथी ग्राम पंचायत नवडीहा में लगने वाले साप्ताहिक बाजार के समीप पहुंच गया था। जिससे ग्रामीणों में दहशत की स्थिति निर्मित हो गई थी। हालांकि फिलहाल यह हाथी सिर्फ फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है। खासकर चांदनी बिहारपुर और प्रतापपुर इलाके में हाथियों का आतंक लगातार जारी है। हाथियों ने दर्जनों ग्रामीणों के घरों को क्षतिग्रस्त करने के साथ ही कई ग्रामीणों को मार डाला है। उक्त इलाको में ग्रामीण ख़ौ$फज़दा हैं। बिहारपुर इलाके में हाथी मोहरसोप समेत नवडीहा, बसनरा, जुड़वनिया व कछिया आदि गांवो में करीब डेढ़ माह से विचरण कर रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक दिन भर हाथी गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में रहता है और शाम ढलते ही हाथी जंगल से निकलकर उनके खेतों की ओर रूख कर लेता है। जहां रात भर खेतों में लगे धान, मक्का, तिल, अरहर, बाजरा, कोदो, जौ समेत अन्य फसलों को खाने के साथ ही रौंदकर क्षति पहुंचा रहा है। हाथी प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में हाथी के घुसने की सूचना देने वे जब भी रेंजर को जानकारी देने काल करते है, तो अक्सर उनका मोबाइल बन्द रहता है। जिससे वे काफी व्यथित और परेशान हैं। कमोबेश वन कर्मियों की भी यही स्थिति रहती है। काल लगता भी है, तो नतीजा सिफर रहता है। यही वजह हैं कि उन्हें हाथी को खदेडऩे देशी जुगाड़ का इस्तेमाल करना पड़ता है। वे ग्रामीणों की मदद से ट्रैक्टर के सायलेंसर इत्यादि के सहारे शोर मचा कर हाथी को जंगल की ओर खदेडऩे को मजबूर होते हैं। ग्रामीणों ने क्षेत्र में लगातार हाथियों के विचरण हो रही जन-धन की हानि रोकने शासन-प्रशासन से जरूरी पहल करने मांग की है। बता दें कि चांदनी बिहारपुर इलाके में कई स्थानों पर ग्रामीण आजादी के बाद आज भी ढिबरी युग में जीवनयापन करने को मजबूर हैं। वैसे तो प्रशासन ने वैकल्पिक तौर पर ऐसे स्थानों में सौर पैनल स्टेशन स्थापित कर विद्युत व्यवस्था की है, लेकिन बरसात के मौसम में सौर पैनल भी पूरी तरह से ठप हो जाता है। जिससे रात में हाथियों की निगरानी में ग्रामीणों को काफी जद्दोजहद करनी पड़ती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली न होने के कारण रात में हाथी के विचरण से उन्हें रतजगा करने भी विवश होना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि आला अधिकारियों की उदासीनता भी उन्हें नागवार गुजरती है। नेटवर्क कवरेज की वजह से परेशानी है। हम सतत हाथी की निगरानी कर रहे है। प्रभावित इलाकों में मुनादी कराकर उन्हें रात में बेवजह घरों से नही निकलने के साथ ही सजग रहने की सलाह दी जा रही हैं। कछिया नवडीहा क्षेत्र में हाथी का विचरण हो रहा है। दिन में वह घासीदास राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र के जंगल मे चला जाता है। वह केवल फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है।

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