
शिमला, २८ फरवरी । विधानसभा में बुधवार को अगले वित्त वर्ष के लिए बजट पारित होगा। मुख्यमंत्री सुक्खू ने 17 फरवरी को विधानसभा में बजट पेश किया था। 28 फरवरी को बजट पारित होना है। मौजूदा हालात को देखते हुए विपक्ष ने बजट पर मतदान करवाने के लिए विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया को लिखित तौर पर प्रस्ताव दिया है। विधानसभा बजट सत्र कांग्रेस के छह विधायकों द्वारा राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी के खिलाफ मतदान करने के कारण पैदा हुई स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू अपनी ही पार्टी के विधायकों पर निशाना साधेंगे। ऐसा माना जा रहा है कि सरकार से नाखुश चल रहे विधायकों की संख्या 15 से 17 तक पहुंच सकती है। विधानसभा में प्रश्नकाल से पहले ही दोनों ओर से आरोप-प्रत्यारोप लगाने की शुरूआत होगी। विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान 70 प्रश्नों पर विपक्ष और सत्ता पक्ष के विधायकों की ओर से तीखे प्रश्न पूछे जाएंगे। 400 शब्द भाजपा ने मतदान के लिए प्रस्ताव दिया, विपक्षी भाजपा ने देर रात बजट पारित करने के लिए मतदान करवाने का प्रस्ताव दिया है। इस प्रस्ताव पर भाजपा के सभी 25 विधायकों के हस्ताक्षर हैं। राज्यसभा चुनाव जीतने के बाद विपक्षी भाजपा ने विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया को बुधवार को बजट पर मतदान करवाने की मांग रखी। इसके लिए नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर सहित सभी 25 विधायकों की ओर से हस्ताक्षरित प्रस्ताव अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया को सौंपा है। विपक्ष की ओर से देर रात रणनीति इसलिए बदली गई है, क्योंकि राज्यसभा चुनाव जीतने के बाद सदन में प्रदेश कांग्रेस सरकार के पास अंक गणित गड़बड़ा गया है। विरोध पर उतर आए कांग्रेस विधायकों के साथ-साथ कई अन्य विधायक व मुख्य संसदीय सचिव भी विद्रोह में शामिल हो सकते हैं। ऐसे में सरकार के सामने बजट को पास करवाना चुनौतीपूर्ण होगा।विपक्ष की ओर से रणनीति बनाई गई है कि ये जरूरी नहीं है कि विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया बुधवार को कटौती प्रस्तावों के तहत मतदान की अनुमति प्रदान करें। इसका प्रमाण आज स्वास्थ्य से जुड़े कटौती प्रस्ताव पर मिल गया था। ऐसे में विपक्षी भाजपा विधायकों ने बैठक करके बजट पर मतदान करवाने की मांग से जुड़ा प्रस्ताव रात को अध्यक्ष को दिया है। जिस तरह की परिस्थितियां नजर आ रही हैं, उसमें राजभवन की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। कटौती प्रस्ताव पर मतदान होने की स्थिति में यदि सरकार अल्पमत में आ जाती है या फिर बजट पर होने वाले मतदान में इसी तरह की स्थिति बनती है तो राजभवन पर पूरा दारोमदार रहेगा।हिमाचल में पहली बार राज्यसभा चुनाव के लिए इतनी मशक्कत नहीं हुई है। साल 2000 के राज्यसभा चुनाव में भी क्रॉस वोटिंग हुई थी। उस चुनाव में कृपाल परमार भाजपा के प्रत्याशी थे। कांग्रेस के दो विधायकों ने कृपाल परमार को मत दिया था। इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह ने ऐसे विधायकों को काली भेड़ों की संज्ञा दी थी। उन्होंने कई बार इस शब्द का प्रयोग किया। इस बार भी शुरू से ही राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग को लेकर कयास लगाए जो रहे थे। भाजपा राज्यसभा चुनाव से उत्साहित होकर अविश्वास प्रस्ताव से लेकर सरकार को बैकफुट में लाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। कांग्रेस आगे अपने वित्तीय बिल को लेकर ज्यादा सचेत रहेगी। इसके लिए भी सभी विधायकों को व्हिप जारी किया जा सकता है कि जब इसके लिए मत की गणना हो तो उन्हें सदन की भीतर ही मौजूद रहना होगा।



























