
नईदिल्ली 09 मार्च ।
ईरान-अमेरिका युद्ध और पश्चिम एशिया में बढ़ते जियोपॉलिटिकल टेंशन की वजह से 9 मार्च को भारतीय शेयर बाजार जोरदार गिरावट के साथ खुले, जिसमें निफ्टी 24000 से नीचे आ गया। वहीं, सेंसेक्स 2300 प्वाइंट्स टूटकर 76750 पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी पर श्रीराम फाइनेंस, इंटरग्लोब एविएशन, एशियन पेंट्स, L&T, अडानी पोर्ट्स बड़े लूजर्स में से हैं, जबकि ONGC और कोल इंडिया फिलहाल गेनर्स हैं। शेयर बाजार में गिरावट का संकेत गिफ्ट निफ्टी से भी मिल रहा था, जो कि सुबह साढ़े 7 बजे 765.50 अंक या 3.11 फीसदी की जबरदस्त गिरावट के साथ 23810.50 पर था। निवेशकों की नजर वेस्ट एशिया में हो रहे डेवलपमेंट और ग्लोबल एनर्जी सप्लाई पर उनके असर पर है। साथ ही क्रुड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और बड़े ग्लोबल रिस्क सेंटिमेंट पर भी फोकस रहेगा।
कच्चे तेल में तेजी से टूटे IOC, BPCL और HPCLके शेयर
मध्य पूर्व में जारी तनाव के चलते तेल आपूर्ति को लेकर भारी संकट पैदा हो गया, जिसके चलते कच्चे तेल की कीमत 115 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर पहुंच गई। इसके चलते 9 मार्च को ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई। इसके अलावा, खबरों में यह भी कहा गया है कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की जाएगी और अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में इस उछाल के चलते ओएमसी को कम मुनाफे से ही संतोष करना पड़ सकता है। शेयर बाजार में 9 मार्च को आई भारी गिरावट की 4 बड़ी वजह हैं। इनमें कच्चे तेल में उछाल, विदेशी निवेशकों की बिकवाली, रुपये में कमजोरी और ग्लोबल मार्केट में कमजोरी शामिल हैं।
कच्चे तेल में उछाल: ब्रेंट क्रुड की कीमत शुरुआती कारोबार में लगभग 26 प्रतिशत बढक़र लगभग 119 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गई, जो जुलाई 2022 के बाद का उच्चतम स्तर है। इराक और कुवैत ने तेल उत्पादन में कटौती शुरू कर दी है। कमजोर वैश्विक संकेत: एशियाई बाजारों में भी भारी बिकवाली देखी गई। दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक 7 प्रतिशत से अधिक गिर गया और जापान का निक्केई 225 सूचकांक 6.5 प्रतिशत नीचे आ गया। चीन का शंघाई एसएसई कंपोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक भी निचले स्तर पर कारोबार कर रहे थे। लगातार विदेशी संस्थागत निवेशकों की निकासी: विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने शुक्रवार को 6,030.38 करोड़ रुपये के शेयर बेचकर अपनी बिक्री जारी रखी।
कमजोर रुपया: कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और अमेरिकी मुद्रा के मजबूत होने के बीच, रुपया सोमवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 46 पैसे गिरकर 92.28 पर आ गया, जो सर्वकालिक निचला स्तर है। बाजार में जारी गिरावट के बीच जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ मार्केट स्ट्रेटेजिस्ट आनंद जेम्स ने कहा कि निफ्टी 23,535 की ओर बढ़ सकता है। उन्होंने कहा, इस स्तर के टूटने से और गिरावट बढ़ सकती है, जो शुरू में मार्च 2025 के निचले स्तर (लगभग 22,000) और नवंबर 2023 के निचले स्तर (लगभग 19,000) तक जा सकती है। निकट भविष्य में तेजी की संभावना 24,000 से ऊपर टिके रहने की क्षमता पर निर्भर करेगी। जियो पॉलिटिकल टेंशन के बीच विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली कर रहे हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 6,030.38 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं।




















